सगाई की फोटो बनी साइबर ठग का हथियार: ‘हैलो जीजाजी, मैं आपकी साली बोल रही हूं’ कहकर ऐंठे हजारों रुपए

सवाई माधोपुर पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठग को गिरफ्तार किया है जो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की सगाई-शादी की जानकारी जुटाकर खुद को ‘साली’ बताकर कॉल करता था।

May 30, 2026 - 12:46
सगाई की फोटो बनी साइबर ठग का हथियार: ‘हैलो जीजाजी, मैं आपकी साली बोल रही हूं’ कहकर ऐंठे हजारों रुपए

कल्पना कीजिए कि आपके घर में सगाई हुई है। परिवार खुशियों में डूबा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा की गई हैं। रिश्तेदार बधाइयां दे रहे हैं और कमेंट बॉक्स शुभकामनाओं से भरा हुआ है। लेकिन इसी भीड़ में कोई ऐसा भी मौजूद है, जो आपकी खुशी में शामिल नहीं बल्कि आपकी निजी जानकारी के जरिए ठगी की योजना बना रहा है।

सवाई माधोपुर पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है, जिसका तरीका बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक था। आरोपी सोशल मीडिया पर लोगों की निजी जानकारी और रिश्तों का अध्ययन कर खुद को रिश्तेदार बताकर फोन करता था और भरोसा जीतकर पैसे ठग लेता था।

सोशल मीडिया से तैयार करता था पूरा फैमिली ट्री

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कोई सामान्य फ्रॉड कॉलर नहीं था। वह घंटों फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की प्रोफाइल खंगालता था। किसकी सगाई हुई है, किसकी शादी तय हुई है, कौन किसका जीजा, साला या रिश्तेदार है—इन सभी जानकारियों को वह सोशल मीडिया पोस्ट, टैग, कमेंट और तस्वीरों के जरिए जुटाता था।

इन सूचनाओं के आधार पर आरोपी पीड़ित का पूरा फैमिली नेटवर्क समझ लेता था। यानी लोग जो जानकारी खुशी-खुशी सार्वजनिक कर रहे थे, वही उसके लिए ठगी का ब्लूप्रिंट बन जाती थी।

‘ऑपरेशन साली’ के नाम से चलता था खेल

जानकारी जुटाने के बाद आरोपी किसी तरह पीड़ित का मोबाइल नंबर हासिल करता और फिर शुरू होता था उसका सबसे बड़ा हथियार—फर्जी रिश्तेदारी का जाल।

फोन उठते ही सामने से लड़की जैसी आवाज आती—

“हैलो जीजाजी... मैं आपकी साली बोल रही हूं।”

चूंकि सगाई या शादी के बाद सभी रिश्तेदारों को एक-दूसरे की आवाज और पहचान पूरी तरह याद नहीं होती, इसलिए लोगों को शक भी नहीं होता था। आरोपी परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी ऐसी बातें करता था, जो उसने सोशल मीडिया से हासिल की होती थीं। इससे पीड़ित का भरोसा और मजबूत हो जाता था।

भरोसा जीतने के बाद मांगता था पैसे

जब आरोपी को लगता कि सामने वाला पूरी तरह भरोसा कर चुका है, तब वह किसी इमरजेंसी, जरूरी पेमेंट या आर्थिक परेशानी का बहाना बनाता था।

रकम भी इतनी मांगी जाती थी कि पीड़ित को ज्यादा संदेह न हो। अक्सर लोग यह सोचकर पैसे भेज देते थे कि परिवार का ही कोई सदस्य मदद मांग रहा है। पैसा खाते में पहुंचते ही आरोपी संपर्क खत्म कर देता था।

बाद में जब असली रिश्तेदार से बात होती, तब पीड़ित को पता चलता कि जिस ‘साली’ की मदद की थी, उसने तो कभी फोन ही नहीं किया था।

शिकायतों के बाद खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब साइबर हेल्पलाइन 1930 पर लगातार एक जैसी शिकायतें आने लगीं। कई लोगों ने बताया कि उन्हें रिश्तेदार बनकर कॉल किया गया और बाद में उनसे पैसे ठग लिए गए।

सवाई माधोपुर कोतवाली थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों, लेन-देन और मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान पुलिस को एक नेटवर्क का पता चला, जो इस पूरे फ्रॉड को अंजाम दे रहा था।

पहले एक आरोपी, फिर पकड़ा गया मास्टरमाइंड

जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले नरेंद्र सैनी नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद पुलिस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंची।

पुलिस ने बारां जिले के निवासी 24 वर्षीय गणेश उर्फ दिलखुश को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि वही इस पूरे साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का मुख्य संचालक था और सोशल मीडिया से लोगों की निजी जानकारी जुटाकर रिश्तों का दुरुपयोग करता था।

इस घटना से क्या सीख मिलती है?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपी ने कोई हाईटेक हैकिंग नहीं की। उसने किसी का फोन या बैंकिंग सिस्टम नहीं तोड़ा। उसने केवल वही जानकारी इस्तेमाल की, जिसे लोगों ने खुद सार्वजनिक कर रखा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर निजी रिश्तों, पारिवारिक समारोहों, मोबाइल नंबरों और व्यक्तिगत जानकारियों को सार्वजनिक रूप से साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

किसी भी रिश्तेदार के नाम से पैसे मांगने वाला फोन आने पर पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें। वीडियो कॉल, परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क या सीधे संबंधित व्यक्ति से बात कर जानकारी सत्यापित करना जरूरी है।

सवाई माधोपुर का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी अब तकनीक से ज्यादा लोगों की भावनाओं और भरोसे को निशाना बना रहे हैं।

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