रूस का भारत को ऐतिहासिक ऑफर: Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट्स के साथ बिना शर्त तकनीक ट्रांसफर, F-35 का मजबूत विकल्प

दुबई एयर शो 2025 में रूस ने भारत को पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 देने का ऐतिहासिक ऑफर दिया है। रोस्टेक सीईओ ने कहा कि रूस विमान के साथ इंजन, रडार, स्टेल्थ तकनीक सहित पूरी तकनीक बिना किसी शर्त के ट्रांसफर करेगा और भारत में ही लाइसेंस प्रोडक्शन की भी अनुमति देगा। यह ऑफर अमेरिकी F-35 का सीधा विकल्प है और पुतिन के दिसंबर भारत दौरे से पहले आया है।

Nov 19, 2025 - 17:21
रूस का भारत को ऐतिहासिक ऑफर: Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट्स के साथ बिना शर्त तकनीक ट्रांसफर, F-35 का मजबूत विकल्प

दुबई, 19 नवंबर 2025: दुबई एयर शो 2025 के दौरान रूस ने भारत को रक्षा क्षेत्र में एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जो दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। रूसी सरकारी कंपनी रोस्टेक के सीईओ सेर्गेई केमेजोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस न केवल अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57E की आपूर्ति करने को तैयार है, बल्कि इसकी पूरी तकनीक—इंजन, रडार, स्टेल्थ कोटिंग, एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों सहित—को बिना किसी प्रतिबंध के ट्रांसफर करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। यह ऑफर ऐसे समय आया है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत यात्रा पर आने वाले हैं, और हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की थी।यह प्रस्ताव अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II का सीधा मुकाबला करने वाला माना जा रहा है, जिसे अमेरिका लंबे समय से भारत को बेचने की कोशिश कर रहा है। लेकिन रूस का ऑफर न केवल विमान की आपूर्ति तक सीमित है, बल्कि भारत में ही लाइसेंस प्राप्त उत्पादन, भारतीय हथियारों का इंटीग्रेशन और लंबे समय तक मेंटेनेंस सपोर्ट भी शामिल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारत की वायुसेना को क्षेत्रीय चुनौतियों—जैसे चीन के J-20 और पाकिस्तान की उन्नत फ्लीट—का मजबूत जवाब दे सकता है।

दुबई एयर शो: रूस का शक्ति प्रदर्शन और भारत-केंद्रित ऑफर दुबई एयर शो 2025, जो 17 नवंबर से शुरू हुआ, वैश्विक रक्षा उद्योग का एक प्रमुख मंच है। यहां रूस ने Su-57E का निर्यात संस्करण (एक्सपोर्ट वर्जन) प्रदर्शित किया, जिसमें आयताकार 2D थ्रस्ट वेक्टरिंग नोजल्स और उन्नत रडार अवशोषक सामग्री (RAM) जैसी विशेषताएं शामिल हैं। रूसी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के डायरेक्टर जनरल वादिम बेडेखा ने कहा, "भारत की सभी मांगें पूरी तरह स्वीकार्य हैं। हम भारतीय अधिकारियों के साथ गहन संपर्क में हैं।" रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने ANI को बताया, "हम न केवल रूस से Su-57 विमान की आपूर्ति करेंगे, बल्कि भारत में पूर्ण लाइसेंस प्राप्त उत्पादन स्थापित करने के लिए तैयार हैं, जिसमें इंजन, पांचवीं पीढ़ी की निर्माण तकनीक, एवियोनिक्स—सब कुछ शामिल है।"रूस का दावा है कि Su-57 अब उन कमियों को दूर कर चुका है, जिनके कारण भारत 2018 में फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) प्रोजेक्ट से बाहर हो गया था। FGFA Su-57 पर आधारित था, लेकिन स्टेल्थ क्षमता और लागत पर असहमति के चलते रुका। अब रूस दो-सीट वाले संस्करण (टू-सीट मॉडिफिकेशन) पर संयुक्त विकास का भी प्रस्ताव दे रहा है, जो FGFA को पुनर्जीवित कर सकता है।

Su-57: F-35 का 'भारतीय संस्करण'? Su-57 को रूस 'गिद्ध' (Felon) कहता है, जो दुश्मन को 'नोंच-नोंचकर' नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह पांचवीं पीढ़ी का मल्टी-रोल स्टेल्थ फाइटर है, जो रडार सिग्नेचर को न्यूनतम रखते हुए हवा से हवा, हवा से जमीन और हवा से समुद्र पर हमला कर सकता है। मुख्य विशेषताएं:स्टेल्थ क्षमता: रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) मात्र 0.1 वर्ग मीटर, जो F-35 (0.001 m²) के करीब है। आंतरिक हथियार बे (इंटरनल वेपन बे) और रडार अवशोषक कोटिंग्स से दुश्मन रडार पर 'गायब' हो जाता है। 

गति और रेंज: अधिकतम गति मच 2 (2,450 किमी/घंटा), सुपरक्रूज क्षमता (बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति), लड़ाई का दायरा 1,500 किमी।

हथियार: 10 टन तक पेलोड, जिसमें 10 से अधिक एयर-लॉन्च्ड मिसाइलें (जैसे R-77M एयर-टू-एयर)। भारत के लिए खास: एस्ट्रा, रुद्रम जैसी स्वदेशी मिसाइलों का इंटीग्रेशन।

इंजन: दो AL-41F1 इंजन, जिनकी तकनीक ट्रांसफर होगी। रूस दावा करता है कि यह F-35 से सस्ता ($80-100 मिलियन प्रति यूनिट) और अधिक लचीला है।

अन्य: AI-संचालित सेंसर फ्यूजन, 360-डिग्री सेंसर कवरेज, और लंबी अवधि का मेंटेनेंस सपोर्ट।

F-35 की तुलना में Su-57 अधिक 'आक्रामक' माना जाता है—यह हाई-स्पीड डॉगफाइट में बेहतर है, जबकि F-35 सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क सेंट्रिसिटी पर मजबूत। लेकिन अमेरिका तकनीक ट्रांसफर पर सख्त है, जबकि रूस 'अनरिस्ट्रिक्टेड' ऑफर दे रहा है।

ऐतिहासिक संदर्भ: भारत-रूस रक्षा साझेदारी कई दशकों से रूस भारत का प्रमुख हथियार सप्लायर रहा है—Su-30MKI जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 सिस्टम और अकुला-क्लास सबमरीन जैसी आपूर्तियां इसका प्रमाण हैं। 2007 में शुरू FGFA प्रोजेक्ट 2018 में रुका, लेकिन 2025 में एयरो इंडिया शो से रूस ने फिर ऑफर दोहराया। हाल के वर्षों में भारत ने विविधीकरण किया—राफेल (फ्रांस), अपाचे (अमेरिका)—लेकिन पश्चिमी देशों की तकनीक साझा न करने की नीति से असंतोष बढ़ा। रूस का यह ऑफर 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा, HAL की नासिक फैसिलिटी में उत्पादन से नौकरियां सृजित होंगी, और भारत AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को तेज कर सकेगा। CCS ने 2024 में AMCA के लिए 15,000 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिसका प्रोटोटाइप 2-3 साल में तैयार होगा।

कूटनीतिक पृष्ठभूमि: जयशंकर-पुतिन मुलाकात और आगामी दौरा यह ऑफर जयशंकर की हालिया मॉस्को यात्रा के ठीक बाद आया, जहां उन्होंने पुतिन से रक्षा, ऊर्जा और BRICS सहयोग पर चर्चा की। पुतिन का 5 दिसंबर का भारत दौरा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होगा—Su-57 डील के अलावा S-400 डिलीवरी (2026 तक पूरी) और अन्य समझौते हो सकते हैं। रूस का कहना है कि यह साझेदारी 'नो-सैंक्शन रिस्क' वाली है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत के लिए आकर्षक है।सामरिक महत्व: क्षेत्रीय संतुलन और चुनौतियांSu-57E भारत को हवाई श्रेष्ठता देगा, खासकर चीन-पाकिस्तान की बढ़ती फ्लीट के खिलाफ। पाकिस्तान चीनी J-35 पर नजर रखे हुए है, जबकि चीन J-20 का उत्पादन बढ़ा रहा है। रूस का ऑफर सोर्स कोड एक्सेस भी देगा, जिससे भारत स्वदेशी अपग्रेड कर सकेगा। लेकिन चुनौतियां हैं: Su-57 की स्टेल्थ पर बहस (कुछ विश्लेषक F-35 से कमतर मानते हैं), रूस की उत्पादन क्षमता (यूक्रेन युद्ध से प्रभावित, केवल 22 विमान डिलीवर), और CAATSA सैंक्शंस का जोखिम। भारत की तरफ से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन विशेषज्ञ इसे 'गेम-चेंजर' बता रहे हैं।

 रूस का यह ऑफर भारत को रक्षा स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम देता है। पुतिन के दौरे से पहले यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत करता है। यदि डील फाइनल हुई, तो यह न केवल IAF की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत को नया खिलाड़ी बनाएगा। फिलहाल, भारतीय रक्षा मंत्रालय और HAL इसकी जांच कर रहे हैं—परिणाम दिसंबर में साफ हो सकता है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.