‘ट्रबल इंजन’ टिप्पणी पर सियासी तकरार तेज, भाजपा-कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाज़ी बढ़ी.
राजस्थान में ‘डबल इंजन’ बनाम ‘ट्रबल इंजन’ बयान को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा भाजपा सरकार को ‘ट्रबल इंजन’ कहने पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा ने डबल इंजन सरकार को विकास और केंद्र-राज्य समन्वय का मॉडल बताया, जबकि कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है।
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में ‘डबल इंजन’ बनाम ‘ट्रबल इंजन’ को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कड़ा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर भ्रम और अफवाह फैलाने की राजनीति करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
डोटासरा के बयान से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा के चुनावी नारे ‘डबल इंजन सरकार’ पर निशाना साधते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों को ‘ट्रबल इंजन’ करार दिया था। उनका कहना था कि प्रदेश की आम जनता को राहत मिलने के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और सरकार विकास के दावों पर खरी नहीं उतर रही।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी और जनसमस्याओं के मुद्दों पर सरकार अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है, इसलिए ‘डबल इंजन’ का दावा सिर्फ राजनीतिक नारा बनकर रह गया है।
मदन राठौड़ का तीखा पलटवार
डोटासरा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब लोग जागरूक हो चुके हैं और भ्रामक प्रचार को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करती रही है, जबकि जनता अब विकास, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।
राठौड़ ने यह भी कहा कि ‘ट्रबल’ अब कांग्रेस को होने वाला है, क्योंकि जनता विकास कार्यों के आधार पर सरकार का मूल्यांकन कर रही है।
‘डबल इंजन सरकार’ का मतलब बताया
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ‘डबल इंजन सरकार’ का अर्थ केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से तेज विकास करना है। उनके अनुसार, इसी तालमेल के कारण कई लंबे समय से लंबित परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को गति मिली है। उन्होंने जल परियोजनाओं और अंतरराज्यीय समझौतों को इसका उदाहरण बताया।
सियासी माहौल गरमाने के संकेत
राजस्थान में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी माहौल के बीच इस तरह की बयानबाज़ी को राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। दोनों दल अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए जनता के बीच मुद्दों को अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में विकास, जनकल्याण योजनाएं और सरकार के प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।