RTE एडमिशन के बाद अचानक बदला मामला… फीस की मांग से मचा हड़कंप, अब जांच पर सबकी नजरें!
जयपुर में RTE एडमिशन को लेकर ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैशाली नगर स्थित एक निजी स्कूल पर आरोप है कि नियमों के तहत दाखिला मिलने के बावजूद छात्रा से फीस की मांग की गई और दबाव बनाया गया। मामला तब और उलझ गया जब स्कूल ने सरकारी भुगतान न मिलने का हवाला देते हुए अपना रुख सख्त कर लिया। अभिभावकों की लगातार शिकायतों और विभागीय चक्कर के बाद अब शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या RTE जैसे कानून के बावजूद स्कूलों की मनमानी पर रोक लग पाएगी या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह अधूरा रह जाएगा?
जयपुर में शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत एडमिशन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला वैशाली नगर स्थित सन स्टार स्कूल से जुड़ा है, जहां एक छात्रा का RTE के तहत एडमिशन होने के बावजूद कथित तौर पर उससे फीस की मांग की गई और फीस जमा न करने पर स्कूल से नाम काटने की धमकी तक देने के आरोप लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, सत्र 2025-26 के लिए छात्रा का RTE एक्ट के तहत चयन हुआ था और उसे नियमों के अनुसार निशुल्क शिक्षा मिलनी थी। लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि एडमिशन के बाद भी स्कूल प्रशासन लगातार फीस जमा करने का दबाव बनाता रहा। इस दौरान परिजनों ने कई बार स्कूल और शिक्षा विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्कूल प्रबंधन की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि जब तक सरकार की ओर से पुनर्भरण राशि (reimbursement) का भुगतान नहीं होता, तब तक वे छात्रा को निशुल्क शिक्षा देने के लिए बाध्य नहीं हैं। स्कूल का कहना है कि यदि छात्रा को वहीं पढ़ना है तो पूरी फीस जमा करनी होगी, अन्यथा उसे किसी अन्य स्कूल में प्रवेश लेना चाहिए।
इस पूरे मामले को लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से लगातार इस समस्या को लेकर शिक्षा विभाग और स्कूल के बीच दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झोटवाड़ा शहर को पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे नियमों के अनुसार तथ्यात्मक जांच करें और यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, इस घटना ने निजी स्कूलों द्वारा RTE नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया है कि आखिर कब तक निजी स्कूल सरकार के नियमों की अनदेखी करते रहेंगे और शिक्षा विभाग मूकदर्शक बना रहेगा।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि RTE कानून का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा देना है, लेकिन अगर स्कूल ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो यह कानून कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सख्त निगरानी और कार्रवाई की कमी से ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या RTE कानून का सही तरीके से पालन हो पा रहा है या फिर यह केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।