“राजस्थान के सिलेबस से अचानक गायब हुईं 4 किताबें… आखिर क्या है पूरा मामला?”
राजस्थान के स्कूल सिलेबस में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां कक्षा 9 से 12 तक की चार अहम किताबों को अचानक पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। इन किताबों में राजस्थान के इतिहास, संस्कृति और आजादी के बाद के भारत से जुड़ी सामग्री शामिल थी। इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था में हलचल मच गई है और कई सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर इन किताबों को क्यों हटाया गया और इसके पीछे असली वजह क्या है। फिलहाल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है, लेकिन पूरा मामला अभी भी चर्चा और रहस्य का विषय बना हुआ है।
राजस्थान के स्कूली शिक्षा सिस्टम में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर की सिफारिश के बाद राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई जाने वाली चार अहम पुस्तकों को सिलेबस से हटाने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद अब छात्रों को राजस्थान के इतिहास, संस्कृति और आजादी के बाद के भारत से जुड़ी इन पुस्तकों का अध्ययन नहीं करना होगा।
यह बदलाव आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा, और इसके साथ ही इन पुस्तकों का निशुल्क वितरण भी पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद पूरे राज्य के स्कूलों में इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कौन-कौन सी किताबें सिलेबस से बाहर?
जारी आदेश के अनुसार जिन चार पुस्तकों को हटाया गया है, वे निम्नलिखित हैं—
- कक्षा 9: राजस्थान का स्वतंत्रता आंदोलन एवं धरोहर (हिंदी/अंग्रेजी माध्यम)
- कक्षा 10: राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति (हिंदी/अंग्रेजी माध्यम)
- कक्षा 11: आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत – भाग 1 (हिंदी/अंग्रेजी माध्यम)
- कक्षा 12: आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत – भाग 2 (हिंदी/अंग्रेजी माध्यम)
इन सभी पुस्तकों को अब राज्य के किसी भी स्कूल में पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी।
कैसे लिया गया यह फैसला?
शिक्षा विभाग के अनुसार यह पूरा निर्णय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। बोर्ड की ओर से इन पुस्तकों को “डिस्कन्टीन्यू” करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलते ही लागू कर दिया गया।
समाज शिक्षा विभाग के उप निदेशक अशोक कुमार पारीक ने जानकारी दी कि यह आदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 11 अप्रैल के पत्र और समग्र शिक्षा, जयपुर के फरवरी में जारी निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम पाठ्यक्रम को अपडेट करने और नई शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
स्कूलों को दिए गए सख्त निर्देश
राज्यभर के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि—
- किसी भी सरकारी या निजी विद्यालय में इन हटाई गई पुस्तकों का उपयोग नहीं किया जाएगा
- शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह निर्णय पूरी तरह लागू रहेगा
- इन पुस्तकों का वितरण और अध्ययन सामग्री के रूप में उपयोग बंद कर दिया जाएगा
अगर किसी स्कूल में इन पुस्तकों का उपयोग पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
राजस्थान में सिलेबस तय करने की प्रक्रिया
राजस्थान में स्कूली शिक्षा का ढांचा दो प्रमुख संस्थाओं के माध्यम से तय होता है। कक्षा 1 से 8 तक का पाठ्यक्रम उदयपुर स्थित एसआईईआरटी (राजस्थान शैक्षिक अनुसंधान परिषद) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
वहीं कक्षा 9 से 12 तक का सिलेबस माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर तैयार करता है। इसके बाद पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर इन किताबों का प्रकाशन करता है और शिक्षा विभाग के माध्यम से उनका वितरण किया जाता है।
इसी प्रक्रिया के तहत इन चार पुस्तकों को अब सिलेबस से बाहर किया गया है।
छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस निर्णय का सीधा असर राज्य के लाखों छात्रों पर पड़ेगा। खासकर वे विद्यार्थी जो इतिहास और समकालीन भारत से जुड़ी इन पुस्तकों का अध्ययन करते थे, अब उन्हें नए सिलेबस और वैकल्पिक अध्ययन सामग्री पर निर्भर रहना होगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलाव से पाठ्यक्रम में बड़ा अपडेट तो आता है, लेकिन छात्रों को नए कंटेंट के अनुसार ढलने में समय लग सकता है।
क्या होगा आगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन पुस्तकों की जगह कौन-सा नया पाठ्यक्रम आएगा और उसमें किन विषयों को शामिल किया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से अभी इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र में राजस्थान के इतिहास और आधुनिक भारत से जुड़े अध्ययन को किस नए रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
निष्कर्ष
राजस्थान में लिया गया यह फैसला केवल किताबों के बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की ओर संकेत करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की समझ पर किस तरह का प्रभाव डालता है।