"अगर लड़ाई लड़नी है तो मुझसे लड़ो"— PSO सस्पेंड होने पर रविंद्र सिंह भाटी का बड़ा हमला
बाड़मेर कलेक्ट्रेट में आत्मदाह की कोशिश के 10 दिन बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी के पीएसओ नखत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। इस कार्रवाई पर भाटी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरे प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की विफलता बताया तथा सरकार पर राजनीतिक द्वेष और लोकतंत्र की आवाज दबाने के आरोप लगाए।
बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर चर्चा में हैं। 19 मई को बाड़मेर कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर विरोध जताने की घटना के 10 दिन बाद उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) नखत सिंह को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद भाटी ने प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाटी का कहना है कि यह किसी एक सुरक्षाकर्मी की विफलता नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की नाकामी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौके पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, मजिस्ट्रेट और खुफिया इकाइयों की टीम मौजूद थी, तब सुरक्षा व्यवस्था और इंटेलिजेंस सिस्टम कैसे विफल हो गया।
"मेरे पीएसओ का नहीं, पूरे सिस्टम का फेलियर"
दैनिक भास्कर से बातचीत में रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि 19 मई को कलेक्ट्रेट परिसर में पूरा पुलिस जाब्ता मौजूद था। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की लंबी टीम मौके पर तैनात थी, फिर भी घटना को रोकने में विफलता रही।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए एक निर्दोष कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई कर दी। भाटी ने कहा कि अगर किसी को राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो सीधे उनसे लड़े, न कि अधीनस्थ कर्मचारियों को निशाना बनाया जाए।
उन्होंने कहा, "अगर लड़ाई लड़नी है तो मेरे से लड़ो। मैं आज भी तैयार हूं और कल भी तैयार रहूंगा।"
"जनता ही मेरी सुरक्षा करेगी"
पीएसओ हटाए जाने के सवाल पर भाटी ने कहा कि फिलहाल उनके पास कोई नया पीएसओ नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें जनता पर पूरा भरोसा है और जनता ही उनकी सुरक्षा करेगी।
भाटी ने कहा, "जाको राखे साइयां मार सके ना कोई। मेरी सबसे बड़ी सुरक्षा जनता का विश्वास और समर्थन है।"
गिरल धरने को लेकर सरकार पर हमला
विधायक भाटी ने गिरल क्षेत्र में चल रहे मजदूर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दो महीने से मजदूर धरने पर बैठे हैं और वह स्वयं भी लगभग एक महीने से आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अब तक आंदोलनकारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया है। सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई और इसके बजाय विरोध की आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
भाटी ने कहा कि जनता ने उन्हें वंचित, शोषित, गरीब और मजदूर वर्ग की आवाज उठाने के लिए चुना है और वह इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे।
"मुकदमे और जेल से नहीं दबेगी आवाज"
भाटी ने कहा कि जो भी सरकार के खिलाफ बोलता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणी की।
उनका कहना था कि सरकार आलोचना करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर रही है, सुरक्षा वापस ले रही है और दबाव की राजनीति कर रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के कदमों से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
भाटी ने कहा, "अगर सरकार को लगता है कि मुकदमे लगाकर, जेल भेजकर या सुरक्षा हटाकर हमें चुप कराया जा सकता है, तो यह उसकी गलतफहमी है।"
"रामराज्य की बात, लेकिन राजा सो रहा है"
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि सरकार रामराज्य और अंत्योदय की बात करती है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ है कि यदि समाज का कोई व्यक्ति पीड़ा में हो तो शासक को चिंता होनी चाहिए। लेकिन आज मजदूर और आम लोग अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है।
भाटी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन वर्तमान हालात में विरोध और असहमति को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या था 19 मई का मामला?
गौरतलब है कि 19 मई को बाड़मेर कलेक्ट्रेट परिसर में रविंद्र सिंह भाटी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया था। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने समय रहते हस्तक्षेप कर उन्हें सुरक्षित बचा लिया।
घटना के बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई और 29 मई को उनके पीएसओ नखत सिंह को निलंबित कर दिया गया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
वहीं, पुलिस अधीक्षक का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत नया पीएसओ भी नियुक्त कर दिया गया है। हालांकि विधायक भाटी का दावा है कि उनके पास फिलहाल कोई नया सुरक्षाकर्मी नहीं है।
राजनीतिक बहस तेज
पीएसओ के निलंबन और रविंद्र सिंह भाटी के बयानों के बाद बाड़मेर की राजनीति में बहस तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रहा है, वहीं भाटी इसे राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक विफलता छिपाने की कोशिश करार दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।