“लोहे की जंजीरों से अस्पताल तक… अशोक शेरा की पहल ने जगाई नई उम्मीद”

राजस्थान के बाड़मेर जिले में मानसिक बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को पिछले दो वर्षों से पेड़ के नीचे लोहे की जंजीरों में बांधकर रखा गया।

May 29, 2026 - 16:13
May 29, 2026 - 16:23
“लोहे की जंजीरों से अस्पताल तक… अशोक शेरा की पहल ने जगाई नई उम्मीद”

राजस्थान का बाड़मेर जिला अपनी भीषण गर्मी और तपते रेगिस्तान के लिए पूरे देश में जाना जाता है। यहां गर्मियों में तापमान 46 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसी झुलसा देने वाली गर्मी के बीच मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जिसने हर संवेदनशील इंसान को सोचने पर मजबूर कर दिया।

बाड़मेर जिले के एक गांव में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ठाकराराम को पिछले करीब दो वर्षों से पेड़ के नीचे लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा गया था। परिवार की मजबूरी यह थी कि बीमारी के कारण वह कई बार आक्रामक हो जाते थे, लोगों से मारपीट कर देते थे और घर से भाग जाने की आशंका बनी रहती थी। गरीबी और इलाज के अभाव में परिवार ने उन्हें जंजीरों में बांध देना ही आखिरी रास्ता समझ लिया।

तपती धूप में जंजीरों में कैद जिंदगी

तस्वीरों में आप देख सकते हो कि ठाकराराम खुले आसमान के नीचे पेड़ के पास जंजीरों से बंधे हुए हैं। चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बारिश, उनका जीवन इसी पेड़ के नीचे बीत रहा था। खाने-पीने से लेकर रात गुजारने तक सब कुछ वहीं हो रहा था।

यह दृश्य सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैली जागरूकता की कमी और सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत को भी उजागर करता है।

तीन मासूम बेटियों का दर्द

सबसे भावुक कर देने वाला पहलू उनकी तीन छोटी बेटियों का दर्द था। जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बच्चों से बात की तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों ने कहा कि वे अपने पिता को ठीक देखना चाहते हैं।

एक बच्चा स्कूल जाता है, लेकिन हर दिन अपने पिता को जंजीरों में देखकर उसका मन टूट जाता है। बच्चों ने बताया कि दूसरे बच्चों के पिता त्योहारों पर घर आते हैं, लेकिन उनके पिता हमेशा इसी हालत में रहते हैं।

“जंजीर से जिंदगी तक” अभियान बना उम्मीद

सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए जा रहे “जंजीर से जिंदगी तक” अभियान के तहत यह मामला सामने आया। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि बाड़मेर ही नहीं, बल्कि जैसलमेर, जोधपुर, जालौर, पाली, सिरोही और जयपुर समेत कई जिलों में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहां मानसिक रूप से बीमार लोगों को जंजीरों से बांधकर रखा जाता है।

अभियान से जुड़े लोगों ने बताया कि अधिकांश मामलों में परिवार इलाज नहीं करवा पाता। कई लोग अंधविश्वास के कारण मरीजों को भोपों, ओझाओं और झाड़-फूंक करने वालों के पास ले जाते हैं। जबकि मानसिक बीमारी का इलाज संभव है और सही दवाइयों व इलाज से कई मरीज सामान्य जीवन में लौट चुके हैं।

गरीबी और मजबूरी बनी सबसे बड़ी वजह

परिवार ने बताया कि उनके पास इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं थे। मानसिक बीमारी के कारण ठाकराराम रात में सो नहीं पाते थे और कई बार हिंसक व्यवहार करने लगते थे। ऐसे में परिवार डर और मजबूरी में उन्हें बांधकर रखने लगा।

ग्रामीण इलाकों में आज भी मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। लोग इसे भूत-प्रेत, देवी-देवताओं या टोने-टोटके से जोड़कर देखते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसका इलाज संभव है।

इलाज की शुरुआत, अब जगी नई उम्मीद

वीडियो में आगे दिखाया गया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ठाकराराम को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। एंबुलेंस बुलवाई गई और उन्हें बाड़मेर से इलाज के लिए रवाना किया गया। डॉक्टरों से संपर्क कर उनके उपचार की प्रक्रिया शुरू करवाई गई।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवार को भरोसा दिलाया कि जल्द ही ठाकराराम को स्वस्थ कर उनके घर वापस लाने की कोशिश की जाएगी।

बड़ा सवाल – आखिर जिम्मेदार कौन?

यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • क्या ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त हैं?
  • क्या सरकार और प्रशासन ऐसे लोगों की पहचान कर इलाज नहीं करवा सकते?
  • करोड़ों रुपये के फंड लेने वाले विभाग और एनजीओ आखिर जमीन पर कितना काम कर रहे हैं?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज, दवाइयों और परिवार के सहयोग से कई मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। जरूरत सिर्फ जागरूकता और संवेदनशीलता की है।

समाज के लिए एक संदेश

यह कहानी सिर्फ ठाकराराम की नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की है जो मानसिक बीमारी के कारण समाज और व्यवस्था से दूर हो जाते हैं। जरूरत है कि ऐसे लोगों को जंजीरों में नहीं, बल्कि इलाज और सहारे से जोड़ा जाए।

इस भावुक और इंसानियत को झकझोर देने वाली खबर का पूरा वीडियो आप हमारे YouTube चैनल पर देख सकते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=Ykx8ObhySLw

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