मजदूरों के समर्थन में यज्ञ पर बैठे MLA भाटी: बोले- हे यज्ञ भगवान, सोई हुई सरकार को जगाओ

बाड़मेर के गिरल गांव में चल रहे मजदूर आंदोलन के समर्थन में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ किया। 25 दिनों से धरना स्थल पर मौजूद भाटी ने यज्ञ के दौरान प्रदेश सरकार से मजदूरों, वंचितों और पीड़ितों की आवाज सुनने की अपील की।

May 30, 2026 - 12:04
मजदूरों के समर्थन में यज्ञ पर बैठे MLA भाटी: बोले- हे यज्ञ भगवान, सोई हुई सरकार को जगाओ

बाड़मेर जिले के गिरल गांव में चल रहे मजदूर आंदोलन ने अब एक नया स्वरूप ले लिया है। पिछले डेढ़ महीने से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे मजदूरों के समर्थन में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। शनिवार को उन्होंने धरना स्थल पर मजदूरों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर प्रदेश सरकार की सद्बुद्धि के लिए विशेष यज्ञ का आयोजन किया और आहूतियां देकर सरकार से श्रमिकों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की।

यज्ञ के दौरान विधायक भाटी ने भावुक अंदाज में कहा, "हे यज्ञ भगवान, प्रदेश सरकार को सद्बुद्धि देना। मजदूरों, वंचितों, शोषितों और पीड़ितों की आवाज सुनें। हे भगवान, सोई हुई सरकार को जगाओ और उसे जनता के दर्द का एहसास कराओ।"

25 दिनों से धरना स्थल पर डटे हैं भाटी

गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े मजदूरों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में रविंद्र सिंह भाटी पिछले 25 दिनों से लगातार धरना स्थल पर मौजूद हैं। वे केवल आंदोलन का समर्थन ही नहीं कर रहे, बल्कि कई रातें भी मजदूरों के बीच धरना स्थल पर गुजार चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि का इतने लंबे समय तक आंदोलनकारियों के बीच रहना और उनके संघर्ष में शामिल होना दुर्लभ है। इससे मजदूरों का मनोबल भी बढ़ा है।

कलेक्ट्रेट कूच के दौरान किया था आत्मदाह का प्रयास

मजदूरों की मांगों को लेकर 19 मई को रविंद्र सिंह भाटी ने बड़ा आंदोलन करते हुए बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट का कूच किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में मजदूर और समर्थक कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।

आंदोलन के दौरान भाटी ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास भी किया था। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और समर्थकों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोक लिया और कलेक्टर कार्यालय के भीतर ले गए।

इसके बाद प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब पांच घंटे तक वार्ता चली, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। वार्ता विफल होने के बाद भाटी फिर से गिरल धरना स्थल पर लौट आए और आंदोलन जारी रखा।

गृह मंत्री को खून से लिखी थी चिट्ठी

आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए रविंद्र सिंह भाटी ने देश के गृह मंत्री के नाम खून से पत्र भी लिखा था। इस पत्र में उन्होंने मजदूरों की समस्याओं और उनकी मांगों को न्यायोचित बताते हुए समाधान की मांग की थी।

इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा में लापरवाही मानते हुए भाटी के निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) नखत सिंह को निलंबित भी कर दिया था।

"यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं"

यज्ञ कार्यक्रम के दौरान भाटी ने कहा कि यह संघर्ष केवल कुछ मजदूरों की नौकरी बचाने का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े श्रमिक वर्षों से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया है। इसी कारण आज उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है।

विधानसभा में भी उठाते रहे हैं मुद्दा

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी कई बार गिरल लिग्नाइट माइंस और वहां कार्यरत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को उठाया है।

उन्होंने स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, श्रमिकों की सुरक्षा, श्रम कानूनों के पालन और मजदूर हितों से जुड़े कई सवाल सरकार के सामने रखे हैं। बावजूद इसके अभी तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया है।

मजदूरों के साथ संघर्ष जारी रखने का ऐलान

भाटी ने स्पष्ट कहा कि जब तक मजदूरों की जायज मांगों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती है तो जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे जनता के साथ खड़े रहें।

उन्होंने मजदूरों को भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई को हर मंच पर उठाया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलन पर पूरे प्रदेश की नजर

गिरल गांव में चल रहा यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। रविंद्र सिंह भाटी की सक्रिय भूमिका, आत्मदाह प्रयास, खून से लिखी चिट्ठी और अब सरकार की सद्बुद्धि के लिए किए गए यज्ञ ने इस आंदोलन को प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना दिया है।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार मजदूरों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और लंबे समय से जारी इस आंदोलन का समाधान कब निकलता है।

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