NEET पेपर लीक 2026: 2024 से नहीं लिया सबक! 46 में से 44 आरोपी जमानत पर, वही नेटवर्क फिर बना सिस्टम की कमजोरी
NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में 46 गिरफ्तारियों के बावजूद अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल अब तक शुरू नहीं हो पाया।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। 2026 में हुए कथित पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तक पहुंच गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या 2024 के NEET पेपर लीक मामले से कोई सबक लिया गया था?
2024 के मामले की जांच, चार्जशीट, अदालतों में हुई सुनवाई और आरोपियों को मिली जमानतों का रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि पेपर लीक नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। बल्कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बीच कई ऐसे संकेत मौजूद थे, जो भविष्य में फिर ऐसी घटना होने की आशंका जता रहे थे।
46 गिरफ्तारियां, लेकिन लगभग सभी आरोपी जमानत पर
2024 के NEET पेपर लीक मामले की जांच पहले बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने की और बाद में मामला CBI को सौंप दिया गया। जांच के दौरान कुल 46 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें से 45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 44 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं। कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया के खिलाफ CBI समय सीमा के भीतर पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सकी, जिसके चलते उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। हालांकि वह अन्य मामलों के कारण अब भी जेल में है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतने बड़े परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपी एक वर्ष के भीतर ही जेल से बाहर आ गए, जबकि मुकदमे की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
नाम बदले, लेकिन नेटवर्क का तरीका नहीं
जांच में सामने आया कि 2024 और 2026 के मामलों में आरोपियों के नाम अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों का संचालन लगभग एक जैसे नेटवर्क के जरिए किया गया।
कोचिंग संस्थानों, एजुकेशन कंसल्टेंसी, करियर काउंसलिंग सेंटर और सॉल्वर गैंग की भूमिका दोनों मामलों में प्रमुख रूप से सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ आरोपी पहले भी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट और सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े रहे हैं।
जमानत मिलने के बाद इनमें से कई लोग फिर शिक्षा और एडमिशन काउंसलिंग के व्यवसाय में सक्रिय हो गए।
पांच महीने पहले से शुरू हो जाती थी तैयारी
CBI जांच के अनुसार 2024 के पेपर लीक नेटवर्क को पहले से भरोसा था कि वे परीक्षा प्रश्नपत्र तक पहुंच बना लेंगे। इसी विश्वास के आधार पर परीक्षा से लगभग पांच महीने पहले तैयारी शुरू कर दी गई थी।
सॉल्वर गैंग तैयार किए गए, संभावित उम्मीदवारों की पहचान की गई, यात्रा और ठहरने की व्यवस्थाएं की गईं और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र रटवाने की पूरी योजना बनाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी इससे पहले भी कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में सक्रिय रह चुके थे।
कौन था कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया?
NEET 2024 मामले में सबसे चर्चित नाम संजीव मुखिया का रहा। बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला संजीव मुखिया पहले सरकारी नौकरी में था, लेकिन बाद में राजनीति और कथित तौर पर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार उसका नाम बिहार सिपाही भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य कई परीक्षा घोटालों में सामने आ चुका है। हालांकि NEET मामले में CBI उसके खिलाफ समय पर पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सकी, जिसके चलते उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई।
कैसे काम करता था सॉल्वर गैंग?
CBI की जांच में सामने आया कि नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता था।
सबसे पहले आर्थिक रूप से सक्षम अभ्यर्थियों की पहचान की जाती थी। इसके बाद उन्हें बेहतर रैंक और सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का भरोसा दिलाया जाता था। कथित तौर पर लाखों रुपये की डील तय होती थी।
फिर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर उसे विशेषज्ञ सॉल्वरों से हल कराया जाता था। हल किए गए प्रश्नपत्र उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते और उन्हें रातभर रटवाया जाता था।
कुछ मामलों में परीक्षा केंद्रों का चयन भी रणनीतिक तरीके से कराया गया ताकि उम्मीदवार उन स्थानों पर पहुंच सकें जहां नेटवर्क सक्रिय था।
काउंसलिंग सेंटर की भूमिका जांच के दायरे में
जांच में ओडिशा के एक करियर काउंसलिंग नेटवर्क का नाम भी सामने आया। आरोप है कि यह नेटवर्क मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश के इच्छुक छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बेहतर परिणाम का भरोसा देता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ उम्मीदवारों के परीक्षा केंद्र विशेष रूप से झारखंड के हजारीबाग में डलवाए गए थे, जहां से प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगा।
जमानत इतनी जल्दी क्यों मिली?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश आरोपियों को इसलिए जमानत मिल गई क्योंकि जांच पूरी हो चुकी थी और कई मामलों में सीधे भौतिक साक्ष्य (Material Evidence) बरामद नहीं हो सके।
वकीलों का तर्क था कि आरोपियों के पास से लीक प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ। ऐसे में अदालतों ने जांच पूरी होने और लंबी हिरासत की आवश्यकता न होने के आधार पर उन्हें सशर्त जमानत दे दी।
हालांकि सभी आरोपियों को मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहना होगा और किसी भी प्रकार से सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त लागू है।
अब 2026 के मामले में क्या स्थिति है?
2026 के NEET पेपर लीक मामले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच CBI के हाथों में है।
आरोप है कि कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाकर उसे याद किया और बाद में नेटवर्क के माध्यम से अन्य लोगों तक जानकारी पहुंचाई। यदि जांच एजेंसियां प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाने में सफल नहीं होतीं, तो 2024 की तरह इस मामले में भी अदालत में आरोप साबित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यही कारण है कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और परीक्षा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल
NEET 2024 पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार, NTA और विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने का दावा किया था। नई गाइडलाइन, निगरानी तंत्र और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए थे।
इसके बावजूद 2026 में फिर पेपर लीक का आरोप सामने आना बताता है कि समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क और सिस्टम की कमजोरियों से जुड़ी है।
जब तक जांच, मुकदमे और सजा की प्रक्रिया तेज और प्रभावी नहीं होगी, तब तक ऐसे नेटवर्क दोबारा सक्रिय होने का खतरा बना रहेगा।