"भगवान आपको माफ नहीं करेगा..." वायरल ऑडियो से मचा बवाल, अभिषेक हमले के बाद ममता का गुस्सा!
सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अस्पताल प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में कथित हमला हुआ। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अब इस पूरे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जहां एक ओर अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर उनका एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
सोनारपुर में क्या हुआ था?
जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी अपने राजनीतिक दौरे के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर पहुंचे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उनका विरोध किया। आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन पर अंडे फेंके गए और पथराव भी हुआ।
स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने अभिषेक बनर्जी को सुरक्षा घेरे में लिया और हेलमेट पहनाकर भीड़ से बाहर निकाला। टीएमसी नेताओं का दावा है कि इस हमले में अभिषेक घायल हुए और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
वायरल ऑडियो ने बढ़ाई सियासी गर्मी
घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह अस्पताल प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी से नाराजगी जाहिर करती सुनाई दे रही हैं।
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर ममता बनर्जी कहती हैं कि अस्पताल प्रशासन ने गलत फैसला लिया है और उन्हें अपने व्यवहार पर शर्म आनी चाहिए। ऑडियो में यह भी सुनाई देता है कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में जवाबदेह ठहराने की चेतावनी दी।
हालांकि, इस वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। न ही इस संबंध में आधिकारिक तौर पर ऑडियो की सत्यता को लेकर कोई प्रमाण सार्वजनिक किया गया है। इसके बावजूद यह ऑडियो राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।
अस्पताल प्रशासन पर ममता के गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी की स्थिति गंभीर नहीं थी, तो उन्हें आईटीयू (इंटेंसिव थेरेपी यूनिट) में क्यों रखा गया था? और यदि उनकी हालत गंभीर थी, तो उन्हें अस्पताल से इतनी जल्दी डिस्चार्ज क्यों कर दिया गया?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक को दबाव में अस्पताल से छुट्टी दी गई है। उन्होंने कहा कि उनके शरीर में खून के थक्के (ब्लड क्लॉट्स) मौजूद हैं और यदि समय रहते सुरक्षा नहीं मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
'हेलमेट नहीं होता तो जान जा सकती थी'
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हमले के दौरान हेलमेट ने अभिषेक बनर्जी की जान बचाई। उनके अनुसार, अगर सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हेलमेट नहीं पहनाया होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
उन्होंने कहा कि अब अभिषेक का इलाज घर पर ही अस्पताल जैसी सुविधाओं के बीच किया जाएगा। इसके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर उठे सवाल
ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि पर इस प्रकार का हमला बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और जांच तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी व्यक्त की।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले और उसके बाद सामने आए वायरल ऑडियो ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। टीएमसी इसे अपने वरिष्ठ नेता की सुरक्षा में गंभीर चूक बता रही है, जबकि विपक्षी दल सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। वहीं, वायरल ऑडियो की सत्यता और उससे जुड़े दावों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और अधिक गरमाहट ला सकता है।