राजस्थान ने पंजाब की ₹1.44 लाख करोड़ रॉयल्टी मांग ठुकराई, बोला- पानी व्यापार नहीं, राष्ट्रीय संसाधन

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राजस्थान से ₹1.44 लाख करोड़ की पानी रॉयल्टी की मांग को राजस्थान सरकार ने खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि पानी राष्ट्रीय संसाधन है, व्यापार की वस्तु नहीं। सरकार का तर्क है कि आजादी के बाद हुए किसी भी समझौते में रॉयल्टी का प्रावधान नहीं है। विवाद बढ़ने के बाद पंजाब सरकार इस मामले को कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 20, 2026 • 4:01 PM  11
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राजस्थान ने पंजाब की ₹1.44 लाख करोड़ रॉयल्टी मांग ठुकराई, बोला- पानी व्यापार नहीं, राष्ट्रीय संसाधन
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राजस्थान ने पंजाब की ₹1.44 लाख करोड़ रॉयल्टी मांग ठुकराई, बोला- पानी व्यापार नहीं, राष्ट्रीय संसाधन

राजस्थान और पंजाब के बीच पानी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भगवंत मान द्वारा राजस्थान से पानी के बदले ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी मांगने पर राजस्थान सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने इस मांग को असंवैधानिक और तथ्यों से परे बताया है।

राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराज्यीय नदियों का पानी किसी राज्य की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधन है। ऐसे में किसी भी राज्य द्वारा पानी पर रॉयल्टी या व्यापारिक दावा करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

1920 के समझौते को लेकर विवाद

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने दावे में 1920 के एक समझौते का हवाला दिया है। उनका कहना है कि उस समय बीकानेर रियासत, बहावलपुर (अब पाकिस्तान में) और ब्रिटिश सरकार के बीच हुए समझौते के तहत पानी के बदले भुगतान तय किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान ने 1960 तक भुगतान किया, लेकिन उसके बाद रॉयल्टी देना बंद कर दिया।

हालांकि राजस्थान सरकार का कहना है कि यह समझौता ब्रिटिश सरकार के साथ था, न कि पंजाब प्रांत के साथ। इसलिए पंजाब का इस आधार पर कोई दावा बनता ही नहीं।

आजादी के बाद हुए समझौतों में रॉयल्टी का जिक्र नहीं

राजस्थान सरकार ने अपने पक्ष में बताया कि आजादी के बाद रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के जल बंटवारे को लेकर 1955, 1959 और 1981 में कई समझौते हुए। इन सभी में कहीं भी रॉयल्टी या किसी प्रकार के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।

सरकार के अनुसार, 1955 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए आवंटन में राजस्थान को 8.00 MAF पानी दिया गया, जबकि 1981 के समझौते में यह बढ़ाकर 8.60 MAF कर दिया गया। इन व्यवस्थाओं के तहत पानी का वितरण केंद्र सरकार की निगरानी में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा किया जाता है।

संविधान का हवाला

मंत्री सुरेश सिंह रावत ने भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262 का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराज्यीय नदी जल विवादों का निपटारा संसद के बनाए कानूनों के तहत होता है। ऐसे मामलों में कोई भी राज्य अपने स्तर पर पानी पर शुल्क या रॉयल्टी नहीं लगा सकता।उन्होंने कहा कि पानी को व्यापारिक वस्तु नहीं माना जा सकता और इस पर किसी प्रकार का वाणिज्यिक दावा करना कानूनन गलत है। राजस्थान अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी गैर-कानूनी मांग को स्वीकार नहीं करेगा।

पंजाब कोर्ट जाने की तैयारी में

राजस्थान के इनकार के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब सरकार इस मामले को अदालत में ले जाएगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट में दोनों पक्ष अपना-अपना पक्ष रखेंगे और वहीं फैसला होगा।मान ने तंज कसते हुए कहा कि “कोई भी खुद को दोषी नहीं मानता, लेकिन सच अदालत में सामने आता है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर राजस्थान रॉयल्टी नहीं देता है, तो उसे पानी लेना बंद करना चाहिए।

क्या है पूरा विवाद

यह विवाद रावी, ब्यास और सतलुज नदी प्रणाली के पानी के उपयोग और भुगतान को लेकर है। पंजाब का दावा है कि राजस्थान पर दशकों से पानी की रॉयल्टी बकाया है, जबकि राजस्थान का कहना है कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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