राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका पर टली सुनवाई: हाईकोर्ट ने सरकार-आयोग के प्रार्थना पत्र पर फैसला रिजर्व रखा, आयुक्त को मिल चुका है नोटिस

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई टल गई। सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर फैसला अभी सुरक्षित है, जिससे चुनाव को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।

May 18, 2026 - 13:31
राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका पर टली सुनवाई: हाईकोर्ट ने सरकार-आयोग के प्रार्थना पत्र पर फैसला रिजर्व रखा, आयुक्त को मिल चुका है नोटिस

राजस्थान में लंबे समय से टल रहे पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर आज राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई, जिससे पूरे मामले में सस्पेंस और बढ़ गया है। यह सुनवाई जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ में होनी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे 26 मई तक के लिए स्थगित कर दिया।

क्यों टली सुनवाई?

कोर्ट ने बताया कि सरकार और राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव टालने को लेकर दायर प्रार्थना पत्र पर पहले ही फैसला सुरक्षित रखा गया है। इसी वजह से अवमानना याचिका पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं हो सकी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

पहले भी जारी हो चुका है नोटिस

इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किए थे। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय सीमा से बाहर क्यों जारी किया गया।

याचिकाकर्ताओं का आरोप

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, गिर्राज सिंह देवंदा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार और आयोग जानबूझकर चुनावों में देरी कर रहे हैं।उनका कहना है कि यह हाईकोर्ट के आदेशों की सीधी अवमानना है और इससे प्रदेश में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति बन गई है।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने चुनाव टालने के पीछे विभिन्न प्रशासनिक और मौसमी परिस्थितियों का हवाला दिया है।

सरकार ने कोर्ट में बताया कि:

  • अप्रैल में स्कूलों में नया सत्र और दाखिले
  • मई-जून में भीषण गर्मी और आपदा प्रबंधन
  • जुलाई-सितंबर में बारिश और ग्रामीण मतदाताओं की व्यस्तता
  • अक्टूबर-दिसंबर में कार्यकाल समाप्ति

सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों में चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए चुनाव को दिसंबर तक टालने की अनुमति दी जाए।

चुनाव आयोग का रुख

राज्य चुनाव आयोग ने भी सरकार के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा है कि ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होने से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।

अब सबकी नजर 26 मई पर

हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने और सुनवाई टलने के बाद अब पूरे राज्य की नजर 26 मई की सुनवाई पर टिकी हुई है। चुनाव कब होंगे, होंगे भी या नहीं इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है और राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है।

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