पेट्रोल-डीजल पर लिमिट का असर, जयपुर-जोधपुर में कई पंप सूखने लगे

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा पंप संचालकों को सीमित मात्रा में ईंधन देने के निर्देश के बाद जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और कोटपूतली-बहरोड़ सहित कई जिलों में पेट्रोल पंप ड्राई होने लगे हैं।

May 19, 2026 - 07:31
May 19, 2026 - 07:33
पेट्रोल-डीजल पर लिमिट का असर, जयपुर-जोधपुर में कई पंप  सूखने लगे

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल पंप संचालकों को ईंधन सीमित मात्रा में देने के निर्देश दिए जाने के बाद राज्यभर में कई पेट्रोल पंप सूखने लगे हैं। राजधानी जयपुर से लेकर जोधपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और कोटपूतली-बहरोड़ तक हालात प्रभावित हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कंपनियों ने पंप संचालकों को मौखिक रूप से या मोबाइल संदेश के जरिए राशनिंग लागू करने को कहा है। इसके बाद कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों को तय सीमा तक ही पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है। इस स्थिति ने आम लोगों के बीच पैनिक का माहौल पैदा कर दिया है।

जयपुर और जोधपुर में सबसे ज्यादा असर

राजधानी जयपुर में आधा दर्जन से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सप्लाई प्रभावित होने की खबर है। वहीं जोधपुर के ग्रामीण इलाकों में करीब 40 प्रतिशत पेट्रोल पंप ड्राई होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान सिंचाई पंपों और कृषि कार्यों के लिए डीजल पर निर्भर हैं, लेकिन पर्याप्त डीजल नहीं मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।

भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में भी कई पंपों पर कार चालकों को केवल 1000 रुपए तक और दोपहिया वाहनों को 300 रुपए तक का ही पेट्रोल दिया जा रहा है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।

एचपीसीएल के पंप सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रदेशभर से मिल रही जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा असर एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर देखने को मिल रहा है। करीब 30 प्रतिशत एचपीसीएल पंपों पर सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर भी लगातार पंप ड्राई होने की सूचनाएं सामने आ रही हैं।

पंप संचालकों का कहना है कि कंपनियों की ओर से इंडेंट की सप्लाई समय पर नहीं मिल रही, जिससे स्टॉक खत्म होने लगा है। कई पंपों पर तो बिक्री पूरी तरह बंद करनी पड़ी।

आखिर क्यों लागू हुई राशनिंग?

सूत्रों के अनुसार तेल कंपनियों ने ईंधन की बिक्री सीमित करने के निर्देश दिए हैं।

आईओसीएल ने एक उपभोक्ता को 50 हजार रुपए तक डीजल और 5 हजार रुपए तक पेट्रोल देने की सीमा तय की है।

बीपीसीएल ने 49 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल तक की लिमिट लागू की है।

एचपीसीएल ने 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा निर्धारित की है।

इसके साथ ही कंपनियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई पंप इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी बिक्री बंद की जा सकती है। यही वजह है कि कई पंप संचालकों ने स्टॉक बचाने के लिए बिक्री सीमित कर दी है।

कंपनियों का दावा – ईंधन की कोई कमी नहीं

हालांकि तीनों तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता होने का दावा किया है। स्टेट लेवल को-ऑर्डिनेटर मनोज गुप्ता के अनुसार राज्य में ईंधन सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और टर्मिनलों से लेकर रिटेल आउटलेट तक किसी प्रकार की बाधा नहीं है।

कंपनियों का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और स्टॉक मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक रूप से ज्यादा ईंधन भरवाकर पैनिक की स्थिति न बनाएं।

डीलर्स एसोसिएशन ने उठाए सवाल

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक सुनीत बगई ने आरोप लगाया कि बिक्री कम करने के लिए जानबूझकर पंपों को ड्राई होने दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार लगातार पर्याप्त ईंधन उपलब्ध होने का दावा कर रही है, तब कंपनियों द्वारा राशनिंग लागू करना विरोधाभासी स्थिति पैदा कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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