राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: 187 करोड़ के फर्जीवाड़े में PHED के तीन इंजीनियरों पर ACB की FIR, हैदराबाद की कंपनी को फेक दस्तावेजों से टेंडर दिए, अधूरे काम को पूरा दिखाया

राजस्थान के जल जीवन मिशन योजना में 187.33 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। ACB ने PHED के तीन इंजीनियरों - दिनेश गोयल, महेंद्र प्रकाश सोनी और सिद्धार्थ टांक के खिलाफ FIR दर्ज की। हैदराबाद की कंपनी भूरथनोम कंस्ट्रक्शन को फर्जी दस्तावेजों और झूठे शपथ पत्रों से टेंडर दिए गए, अधूरे काम (कमीशनिंग और SCADA) को पूरा दिखाकर भुगतान कराया। कुल 5 परियोजनाओं (1493 करोड़) में फर्जीवाड़ा, जांच जारी।

Jan 14, 2026 - 11:07
राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: 187 करोड़ के फर्जीवाड़े में PHED के तीन इंजीनियरों पर ACB की FIR, हैदराबाद की कंपनी को फेक दस्तावेजों से टेंडर दिए, अधूरे काम को पूरा दिखाया

जयपुर: राजस्थान में जल जीवन मिशन योजना के तहत हुए बड़े घोटाले का एक और मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 187.33 करोड़ रुपये के घोटाले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के तीन वरिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने मिलीभगत कर हैदराबाद की कंपनी भूरथनोम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को फर्जी दस्तावेजों और झूठे शपथ पत्रों के आधार पर करोड़ों के टेंडर आवंटित किए। कंपनी ने अधूरे काम को पूरा बताकर सरकारी खजाने से भुगतान हासिल किया, जबकि कई गांवों में अभी भी महत्वपूर्ण काम अधूरा पड़ा है।

FIR सोमवार को दर्ज की गई, जिसमें मुख्य आरोपी हैं:

दिनेश गोयल (तत्कालीन मुख्य अभियंता, विशेष परियोजना, PHED),महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, परियोजना, अजमेर अतिरिक्त प्रभार; वर्तमान में सेवानिवृत्त),सिद्धार्थ टांक (अधिशासी अभियंता, परियोजना खंड मांडल, भीलवाड़ा)

घोटाले का पूरा खुलासा

जांच के अनुसार, कंपनी ने जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश की पांच बड़ी जल आपूर्ति परियोजनाओं में झूठी बोली क्षमता के शपथ पत्र पेश कर हिस्सा लिया। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 1493 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्य आरोप चंबल-भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना पर केंद्रित है, जहां कंपनी ने 187.33 करोड़ रुपये के अधूरे काम को पूरा दिखाकर झूठे शपथ पत्र दिए।

अधूरे काम में शामिल थे:

कमीशनिंग: पाइपलाइन की सफाई, टेस्टिंग और फाइनल चेकिंग।स्काडा (Supervisory Control and Data Acquisition): पानी की सप्लाई की दूरस्थ निगरानी, नियंत्रण और ऑटोमेशन सिस्टम, जिससे लीकेज तुरंत पता चलता है।जून 2023 में कई शिकायतें मिलने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और कंपनी को बचाने के लिए झूठी रिपोर्ट तैयार करवाई। जांच में पाया गया कि पहले केवल मुख्य काम को पूरा दिखाने वाली तथ्यात्मक रिपोर्ट बनाई गई, फिर उसी में संशोधन कर पूरे प्रोजेक्ट को पूरा दिखाया गया। इससे कंपनी को ब्लैक लिस्ट होने या टेंडर से बाहर करने से बचाया गया और सभी पांच परियोजनाओं में योग्य घोषित कर दिया गया।

शामिल प्रमुख परियोजनाएं

कंपनी ने इन पांच बड़े प्रोजेक्ट्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए:सहाड़ा-रायपुर-सुवाणा (भीलवाड़ा),नागौर के खींवसर व मूंडवा खंड,बांसवाड़ा के कुशलगढ़-सज्जनगढ़ खंड,सीकर के फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़ पैकेज-दो,ईसरदा पैकेज-चार (बासा-सिकराई)

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

अधूरे दस्तावेजों के बावजूद कंपनी को योग्य ठहराया गया।फर्जी बोली क्षमता के शपथ पत्रों से टेंडर जारी किए गए।मिलीभगत से रिपोर्ट में संशोधन कर अधूरे काम को पूरा दिखाया।शिकायतों को नजरअंदाज कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया।नवंबर 2023 में एक परिवादी ने ई-मेल के जरिए ACB के महानिदेशक को शिकायत भेजी थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई और FIR दर्ज की गई। यह मामला जल जीवन मिशन योजना में भ्रष्टाचार के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा लगता है, जहां फर्जी दस्तावेजों से टेंडर हासिल कर सरकारी धन की हेराफेरी की गई। ACB की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.