15 हजार रुपये का इनामी बदमाश मनीष उपाध्याय हरिद्वार से गिरफ्तार: 10 साल फरार रहने के बाद सवाई माधोपुर पुलिस की विशेष टीम ने दबोचा
सवाई माधोपुर पुलिस की विशेष टीम ने 10 साल से फरार 15 हजार रुपये के इनामी बदमाश मनीष उपाध्याय को हरिद्वार (उत्तराखंड) से गिरफ्तार किया। आरोपी पर 2015 में 25 लाख रुपये की जमीन सौदे की ठगी का मामला था, जिसमें एससी/एसटी एक्ट भी लगा। ऑपरेशन "शिकंजा" के तहत मुखबिर सूचना और तकनीकी निगरानी से एम्बुलेंस चालक बनकर छिपे आरोपी को दबोचा गया।
सवाई माधोपुर, राजस्थान: सवाई माधोपुर जिला पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस की विशेष टीम ने 10 सालों से फरार चल रहे 15 हजार रुपये के इनामी बदमाश मनीष उपाध्याय को उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी आईजी भरतपुर रेंज के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन "शिकंजा" के तहत हुई है, जिसका उद्देश्य वांछित अपराधियों पर शिकंजा कसना है।
एसपी अनिल कुमार बेनीवाल ने बताया कि आरोपी मनीष उपाध्याय पुत्र जगदीश उपाध्याय, निवासी जवाहर नगर बजरिया, सवाई माधोपुर पर वर्ष 2015 से धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज था। शिकायतकर्ता मथुरालाल मीणा, निवासी केशव नगर बजरिया ने 2 नवंबर 2015 को थाना मानटाउन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि मनीष उपाध्याय ने जमीन के सौदे के नाम पर शिकायतकर्ता से लगभग 25 लाख रुपये प्राप्त किए थे, लेकिन न तो जमीन का रजिस्ट्री कराई और न ही पैसे वापस किए। आरोपी ने धोखाधड़ी से राशि हड़प ली और फरार हो गया।
जांच के दौरान आरोपी मनीष उपाध्याय और उसकी माता कांता देवी के खिलाफ धोखाधड़ी के अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत भी अपराध प्रमाणित हुए। कोर्ट ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया था। वर्ष 2023 में जिला स्तर पर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
मुखबिर की सूचना पर हरिद्वार पहुंची टीम
पुलिस को मुखबिर से विश्वसनीय सूचना मिली कि आरोपी मेडिकल लाइन से जुड़े कार्य कर रहा है और हरिद्वार में छिपा हुआ है। साइबर सेल के एसआई अजीत मोगा को मुखबिर से खास जानकारी मिली कि मनीष उपाध्याय हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पास एक कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा है। इस सूचना पर ASP विजय सिंह मीणा और CO सिटी उदय सिंह मीणा के पर्यवेक्षण में मानटाउन थानाधिकारी सुनील कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई और हरिद्वार भेजी गई।
पुलिस की भनक लगने पर आरोपी ने तुरंत मकान बदल लिया, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। लगातार तलाश, तकनीकी सूचनाओं और मुखबिरों की मदद से पता चला कि आरोपी ने एक एम्बुलेंस वाहन खरीदा है और उसे किराए पर चला रहा है। पुलिस टीम ने दो दिनों तक लगातार निगरानी की और आरोपी का पीछा किया। आखिरकार सतर्कता और सतत प्रयासों से आरोपी को दबोच लिया गया।