Balotra Illegal Mining: खेतों में अवैध बजरी खनन के खिलाफ RLP का कलेक्ट्रेट घेराव, किसानों में आक्रोश
बालोतरा जिले में अवैध बजरी खनन को लेकर ग्रामीणों और RLP कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने खेतों और खातेदारी जमीनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
राजस्थान के बालोतरा जिले में कथित अवैध बजरी खनन के खिलाफ ग्रामीणों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्राम सड़ा के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर लीज नंबर 217 के आसपास खातेदारी जमीनों में हो रहे अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
इस दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के कार्यकर्ताओं ने भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
किसानों की जमीनों को नुकसान का आरोप
RLP नेता थान सिंह डोली ने आरोप लगाया कि जिले में खनन लीज की निर्धारित सीमा से बाहर जाकर बजरी माफिया अवैध खनन कर रहे हैं। इससे किसानों की निजी खातेदारी जमीनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि खेतों में लगे ट्यूबवेल, पाइपलाइन और सिंचाई व्यवस्था को भी लगातार क्षति हो रही है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
विरोध करने वालों को धमकाने का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन का विरोध करने वाले लोगों को धमकियां दी जा रही हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से गांवों में धूल और शोर का भी गंभीर असर देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी इस मामले की शिकायत प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों और RLP कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसमें अवैध बजरी खनन पर तुरंत रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
प्रशासन की ओर से प्रतिनिधियों को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक धरातल पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
किसानों में बढ़ता आक्रोश
लगातार हो रहे अवैध खनन से ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो खेती योग्य जमीनों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।