हड़ताल की धमक में भी दौड़ रही सड़कों पर स्लीपर बसें जोधपुर के ऑपरेटर बोले- 'रोजी-रोटी का सवाल, हड़ताल तो बस नाम की!'

जोधपुर में ऑल इंडिया टूरिस्ट बस एसोसिएशन की हड़ताल के बावजूद स्लीपर बसें समेत निजी बसें चलती दिखीं। जैसलमेर-जोधपुर बस हादसे और जयपुर हादसे के बाद परिवहन विभाग की सख्ती से नाराज एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की। जोधपुर में बॉम्बे मोटर चौराहे पर बसें सवारियां भरकर निकल रही हैं। ऑपरेटर हड़ताल का समर्थन करते हैं, लेकिन कहते हैं - "रोजी-रोटी के लिए बसें चलानी पड़ रही हैं, वो भी लगभग खाली"। हड़ताल का मिला-जुला असर, यात्रियों को परेशानी।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 31, 2025 • 5:00 PM  32
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राजस्थान
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हड़ताल की धमक में भी दौड़ रही सड़कों पर स्लीपर बसें जोधपुर के ऑपरेटर बोले- 'रोजी-रोटी का सवाल, हड़ताल तो बस नाम की!'
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हड़ताल की धमक में भी दौड़ रही सड़कों पर स्लीपर बसें जोधपुर के ऑपरेटर बोले- 'रोजी-रोटी का सवाल, हड़ताल तो बस नाम की!'

जोधपुर, 31 अक्टूबर 2025: राजस्थान के परिवहन विभाग की सख्ती के खिलाफ ऑल इंडिया टूरिस्ट बस एसोसिएशन की हड़ताल आज सुबह से शुरू हो गई, लेकिन जोधपुर की सड़कों पर मिला-जुला नजारा देखने को मिला। एक ओर एसोसिएशन ने पूरे प्रदेश में स्लीपर बसों सहित निजी बसों का संचालन बंद करने का ऐलान किया, वहीं जोधपुर से जैसलमेर रूट पर स्लीपर बसें धड़ल्ले से चलती नजर आईं। बॉम्बे मोटर चौराहे के पास बाड़े से निकल रही इन बसों में सवारियां लदी हुई थीं, जबकि ऑपरेटर हड़ताल के समर्थन में हैं। उनका तर्क है- 'हड़ताल तो चल रही है, लेकिन रोजी-रोटी के लिए कुछ बसें तो चलानी पड़ रही हैं, वो भी लगभग खाली।'

हादसों की आग ने भड़काई हड़ताल की चिंगारी

यह हड़ताल अचानक नहीं भड़की। हाल ही में राजस्थान में हुए दो बड़े बस हादसों ने परिवहन विभाग को एक्शन मोड में ला दिया। 14 अक्टूबर को जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में दोपहर 3:30 बजे अचानक आग लग गई। इस हादसे में 19 लोग मौके पर ही जिंदा जल गए, जबकि एक ने रास्ते में दम तोड़ दिया। कुल 22 मौतें हो चुकी हैं और 6 लोग अभी भी जोधपुर के अस्पतालों में वेंटिलेटर पर जूझ रहे हैं। बस मालिक तुराब अली और ड्राइवर शौकत को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में पता चला कि बस का परमिट एक्सपायर था और 40 बार ओवरलोड व हाईस्पीड के चालान कट चुके थे।इससे महज दो हफ्ते पहले, 28 अक्टूबर को जयपुर के मनोहरपुर इलाके में एक अन्य स्लीपर बस हाईटेंशन तारों से टकराई और भीषण आग लगने से 3 लोगों की मौत हो गई, 10 घायल हुए।इन हादसों के बाद विभाग ने राज्यव्यापी छापेमारी शुरू कर दी। बसों में अवैध संशोधन, ओवरलोडिंग, एक्सपायर्ड परमिट और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हुई। जोधपुर में ही जैनम कोच क्राफ्टर्स परिसर से 66 बसें जब्त कर ली गईं, क्योंकि बॉडी बिल्डिंग के दौरान निर्धारित कोडों का पालन नहीं हुआ था।  कई बसों के चालान काटे गए और कुछ को सीज कर दिया गया।

एसोसिएशन की मांगें: सख्ती हटाओ, या चक्का जाम!

इन कार्रवाइयों से नाराज ऑल इंडिया टूरिस्ट बस ऑनर्स एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया। एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश में 8,000 से ज्यादा स्लीपर बसें रोजाना 3 लाख यात्रियों को सेवा देती हैं।  आज आधी रात से सभी ऑल इंडिया परमिट वाली स्लीपर कोच बसें सड़कों से गायब हो गईं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बंद कर दी गई और जोधपुर, सीकर, भीलवाड़ा समेत कई जिलों में पहले से बुक टिकट रद्द कर पैसे लौटाए जा रहे हैं।

एसोसिएशन की मुख्य मांगें हैं- जुर्माने और सीजिंग पर रोक, सुरक्षा मानकों में छूट, और बस मालिकों की बात सुनी जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 2 नवंबर तक सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो 20,000 से ज्यादा प्राइवेट बसें चक्का जाम करेंगी।लोकल और ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसें हड़ताल से बाहर रखी गई हैं, लेकिन जोधपुर-जैसलमेर, जोधपुर-ओसियां, फलोदी, रामदेवरा जैसे प्रमुख रूट प्रभावित हैं।

जोधपुर में हड़ताल का 'मिला-जुला' असर: स्लीपर बसें क्यों दौड़ रही?जोधपुर में ट्रैवल एसोसिएशन ने दावा किया कि यहां कोई बस नहीं चला रही, लेकिन बॉम्बे मोटर चौराहे पर साफ दिखा कि जैसलमेर रूट की कई स्लीपर बसें बाड़े से निकलकर सवारियां भर रही थीं। एक ऑपरेटर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'हम हड़ताल के पूरी तरह समर्थन में हैं। एसोसिएशन का ऐलान मान्य है, लेकिन रोजी-रोटी का सवाल जोरदार है। आज तो बसें लगभग खाली चल रही हैं- सवारियां मुश्किल से 10-15। इसे हड़ताल ही मान लो, बस नाम का फर्क है।'

कुछ बसों में सामान लोड होता देखा गया, जो बताता है कि ऑपरेटर पूरी तरह ठप्प होने के बजाय न्यूनतम संचालन कर रहे हैं।यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। जोधपुर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर वैकल्पिक ट्रेन व फ्लाइट्स की बुकिंग में उछाल आ गया। कईयों को ऑटो-टैक्सी का सहारा लेना पड़ रहा, जिससे किराया दोगुना हो गया। एक यात्री ने कहा, 'जैसलमेर जाने का टिकट कैंसल हो गया, अब ट्रेन का इंतजार। हड़ताल तो जायज है, लेकिन यात्रियों का क्या?'

आगे क्या? सरकार की चुप्पी तोड़ने की कोशिशें

परिवहन विभाग ने कहा कि सुरक्षा पहले, कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन एसोसिएशन गोपालबाड़ी में दोपहर की मीटिंग में हड़ताल पर फैसला मजबूत करने वाली है।  

अगर बात नहीं बनी, तो 2 नवंबर से बड़ा चक्का जाम हो सकता है। यात्रियों से अपील है- लंबी दूरी की यात्रा से पहले वैकल्पिक व्यवस्था कर लें।यह हड़ताल न सिर्फ परिवहन व्यवस्था को हिला रही, बल्कि सवाल भी खड़े कर रही- सुरक्षा सख्ती और ऑपरेटरों की आजीविका में संतुलन कैसे बने? जोधपुर की सड़कों पर चल रही ये 'आधी-अधूरी' बसें यही बयां कर रही हैं कि संघर्ष अभी जारी है।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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