जयपुर में 6 मंजिला झुकी बिल्डिंग ध्वस्त: 23 दिन बाद नगर निगम ने गिराया अवैध निर्माण, जोरदार धमाके से गिरी इमारत
जयपुर के रामगंज क्षेत्र में निर्माण के दौरान झुक गई 6 मंजिला अवैध बिल्डिंग को नगर निगम ने गुरुवार को नियंत्रित तरीके से गिरा दिया। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के 10 से 15 मकान खाली कराए गए और पूरे इलाके को सील कर कार्रवाई की गई।
राजधानी जयपुर के रामगंज क्षेत्र में गुरुवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली, जब निर्माण के दौरान झुक गई 6 मंजिला इमारत को नगर निगम ने पूरी सुरक्षा और तकनीकी निगरानी के बीच ध्वस्त कर दिया। सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर जैसे ही इमारत जमींदोज हुई, पूरे इलाके में जोरदार धमाके की आवाज गूंज उठी और धूल का बड़ा गुबार आसमान में छा गया।
यह कार्रवाई चौकड़ी रामचंद्रजी क्षेत्र के जगन्नाथ शाह के रास्ते स्थित उस इमारत पर की गई, जो करीब 23 दिन पहले तकनीकी खामियों के कारण एक तरफ झुक गई थी। विशेषज्ञों द्वारा भवन को अत्यंत खतरनाक घोषित किए जाने के बाद प्रशासन ने इसे गिराने का फैसला लिया था।
सुरक्षा के बीच चला ऑपरेशन
बिल्डिंग गिराने से पहले नगर निगम, पुलिस और प्रशासन ने इलाके में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। आसपास के सभी रास्तों को बंद कर बैरिकेडिंग की गई। किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए 10 से 15 मकानों को खाली कराकर वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
इसके अलावा क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद की गई और रामगंज थाना पुलिस सहित प्रशासनिक अधिकारियों का भारी जाब्ता मौके पर तैनात रहा। आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई थी।
सुबह 8:30 बजे शुरू हुई कार्रवाई
नगर निगम की टीम ने सुबह करीब 8:30 बजे ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया। पहले कर्मचारियों ने हथौड़ों और अन्य उपकरणों की सहायता से इमारत के निचले हिस्से और कमजोर हो चुके पिलरों को तोड़ना शुरू किया।
करीब दो घंटे की तकनीकी प्रक्रिया और लगातार निगरानी के बाद सुबह 10:18 बजे पूरी इमारत नियंत्रित तरीके से सामने की ओर गिरा दी गई। इमारत गिरने के बाद मलबे का बड़ा ढेर जमा हो गया, जिसे हटाने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया।
सामने वाली इमारत को भी हुआ नुकसान
ध्वस्तीकरण के दौरान झुकी हुई बिल्डिंग पूरी तरह सामने की ओर गिरी, जिससे सामने स्थित एक भवन को आंशिक नुकसान पहुंचा। इसके अलावा पास में मौजूद एक पेड़ की शाखाएं भी टूट गईं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियंत्रित तरीके से की गई और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
कैसे झुकी थी इमारत?
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह इमारत करीब 10 से 15 साल पुरानी थी और इसमें निर्माण कार्य चल रहा था। 9 मई को भवन के कुछ पिलरों में दरारें आ गईं और संरचनात्मक कमजोरी के कारण पूरी इमारत एक ओर झुक गई।
सूचना मिलने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल भवन को खाली करा दिया गया। इसके बाद विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीकी टीमों से इसकी जांच करवाई गई। रिपोर्ट में भवन को बेहद खतरनाक बताया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया।
बिना अनुमति के बनाया गया था भवन
नगर निगम किशनपोल जोन के उपायुक्त विजेंद्र सिंह ने बताया कि यह छह मंजिला इमारत नियमों के विरुद्ध और बिना किसी वैध अनुमति के बनाई गई थी।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में नियमानुसार छह मंजिल तक निर्माण की अनुमति नहीं है। निर्माण के दौरान भी निगम की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए थे और निगरानी के लिए गार्ड तक तैनात किए गए थे। इसके बावजूद रात के समय चोरी-छिपे निर्माण कार्य जारी रखा गया।
अधिकारियों के अनुसार अवैध निर्माण और तकनीकी मानकों की अनदेखी ही इस पूरे मामले की मुख्य वजह रही।
विशेषज्ञों की निगरानी में गिराई गई बिल्डिंग
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीकी टीम की देखरेख में की गई। ध्वस्तीकरण के दौरान आसपास की इमारतों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
सिविल डिफेंस के डिप्टी कंट्रोलर अमित शर्मा ने कहा कि झुकी हुई इमारत को सभी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए गिराया गया है। कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र को खाली करवा लिया गया था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
अवैध निर्माण पर फिर उठे सवाल
रामगंज की इस घटना ने एक बार फिर शहर में बढ़ रहे अवैध निर्माणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियमों का पालन कराया जाता और अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाई जाती, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मलबा हटाने का काम जारी
बिल्डिंग गिरने के बाद नगर निगम की टीम मलबा हटाने में जुटी हुई है। प्रशासन पूरे इलाके की निगरानी कर रहा है ताकि आसपास की इमारतों को किसी प्रकार का अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
फिलहाल इस पूरे ऑपरेशन को सफल माना जा रहा है क्योंकि इतनी बड़ी इमारत को गिराने के बावजूद किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशासन ने नियंत्रित तरीके से पूरे अभियान को अंजाम दिया।