मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन: फर्जी डिग्री और गड़बड़ियों की जांच के बीच राजस्थान सरकार ने नए एडमिशन पर लगाई रोक, हाईकोर्ट जाएगी यूनिवर्सिटी
फर्जी डिग्री और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के बीच राजस्थान सरकार ने चित्तौड़गढ़ की प्राइवेट मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है।
छात्रों के भविष्य को देखते हुए सरकार ने लिया कड़ा फैसला
राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग ने चित्तौड़गढ़ के गंगरार में स्थित निजी क्षेत्र की 'मेवाड़ यूनिवर्सिटी' को लेकर एक बेहद सख्त कदम उठाया है। सरकार ने यूनिवर्सिटी में चल रहे सभी कोर्सों के नए एडमिशन पर अगले आदेश तक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
सरकार का साफ कहना है कि यूनिवर्सिटी के खिलाफ फर्जी डिग्री और भारी प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच अभी प्रक्रियाधीन है। ऐसे में यदि नए छात्रों को प्रवेश दिया जाता है, तो उनका भविष्य जोखिम में पड़ सकता है। उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए फिलहाल एडमिशन प्रक्रिया को बंद करना बेहद जरूरी था।
फर्जी डिग्री की शिकायतों से शुरू हुआ था पूरा विवाद
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के खिलाफ पिछले काफी समय से फर्जी डिग्रियां बांटने और नियमों को ताक पर रखकर प्रशासनिक काम करने की शिकायतें राज्य सरकार को मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया था।
कारण बताओ नोटिस और अधिनियम की धारा 44(1)
विशेष जांच समिति ने जब मामले की पड़ताल की, तो कई गंभीर अनियमितताएं और खामियां उजागर हुईं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने 'मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ अधिनियम-2009' की धारा 44(1) के तहत यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब मांगा। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण सरकार को भेज दिया था, लेकिन विभाग अभी भी उस जवाब की बारीकी से समीक्षा कर रहा है।
SOG की एंट्री और बड़े पदाधिकारियों की गिरफ्तारियां
यह मामला केवल कागजी गड़बड़ियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की भी एंट्री हुई। एसओजी की जांच के बाद यूनिवर्सिटी से जुड़े कई बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा कसा।
फर्जी डिग्री मामले में कार्रवाई करते हुए एसओजी ने यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रुल, पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा और कार्यालय सहायक (फाइलिंग असिस्टेंट) वीरेंद्र सिंह समेत कई कर्मचारियों व पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया। इस बड़ी कार्रवाई से यूनिवर्सिटी की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
नर्सिंग छात्रों के आंदोलन ने भी बढ़ाई थीं मुश्किलें
यूनिवर्सिटी का विवादों से नाता पुराना रहा है। इसी साल फरवरी महीने में यूनिवर्सिटी परिसर उस समय जंग का मैदान बन गया था, जब बीएससी नर्सिंग (B.Sc. Nursing) के छात्रों ने उग्र आंदोलन शुरू कर दिया था।
छात्रों का आरोप था कि जिस कोर्स में उनका एडमिशन लिया गया है, उसे राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से आवश्यक मान्यता ही नहीं मिली थी। इस विवाद के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच भारी टकराव हुआ, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज करवाए और कई छात्रों को सस्पेंड भी किया गया था।
चेयरमैन अशोक गदिया की आपत्ति: 'हाईकोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा'
दूसरी तरफ, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अशोक गदिया ने राज्य सरकार के इस प्रतिबंधात्मक आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस फैसले को एकतरफा और अन्यायपूर्ण करार दिया है। गदिया का कहना है कि:
"यूनिवर्सिटी जांच समिति के नोटिस का जवाब पहले ही दे चुकी है। एसओजी ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ फर्जी डिग्री का एक भी सीधा मामला दर्ज नहीं किया है। अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी ने व्यक्तिगत स्तर पर कोई फ्रॉड किया है, तो वह उसका निजी कृत्य है, उसके लिए पूरे संस्थान को सजा नहीं दी जा सकती।"
चेयरमैन ने तर्क दिया कि जब तक अदालत किसी को दोषी नहीं ठहरा देती और अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक नए एडमिशन रोकना न्यायोचित नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन इस सरकारी आदेश के खिलाफ जल्द ही राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा।