“अचानक ठप हुई व्यवस्था, घंटों तक थम गई मरीजों की प्रक्रिया… क्या है इस बड़ी परेशानी के पीछे की वजह?”

सरकारी अस्पतालों में अचानक आई तकनीकी खराबी ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दीं… पर्ची से लेकर जांच तक सब कुछ रुक गया, जानिए पूरा मामला।

Apr 8, 2026 - 15:44
“अचानक ठप हुई व्यवस्था, घंटों तक थम गई मरीजों की प्रक्रिया… क्या है इस बड़ी परेशानी के पीछे की वजह?”

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक तकनीकी सिस्टम ठप हो गया और मरीजों से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं रुक गईं। इस समस्या ने अस्पतालों में इलाज के लिए आए सैकड़ों मरीजों को परेशानी में डाल दिया।

जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12:20 बजे सर्वर अचानक बंद हो गया, जिसके कारण ओपीडी पर्ची बनना, जांचों के बिल जनरेट होना और भर्ती-डिस्चार्ज जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी तरह रुक गईं। यह स्थिति करीब एक घंटे तक बनी रही, जिससे अस्पतालों में लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

दरअसल, अस्पतालों में मरीजों की पूरी प्रक्रिया एक केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम के जरिए संचालित होती है, जिसे IHMS पोर्टल कहा जाता है। इसी सिस्टम के माध्यम से रजिस्ट्रेशन, जांच बिलिंग और भर्ती की प्रक्रिया संचालित होती है।

सर्वर ठप होने का असर अस्पताल के हर कोने में देखने को मिला। ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर, जांच बिल काउंटर, दवाई वितरण केंद्र और विभिन्न योजनाओं के रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। कई मरीज घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

अस्पताल में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। पिछले काफी समय से सर्वर धीमा चलने या अचानक बंद होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई बार तो यह स्थिति हर एक-दो दिन में देखने को मिलती है, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।

इस तकनीकी समस्या का असर केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के कई अन्य सरकारी अस्पतालों में भी यही स्थिति देखने को मिली। इससे साफ है कि यह समस्या व्यापक स्तर पर सिस्टम से जुड़ी हुई है।

बताया जा रहा है कि यह पूरा सिस्टम सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT) की मॉनिटरिंग में संचालित होता है। इस सिस्टम का उद्देश्य पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ना है, लेकिन बार-बार आने वाली तकनीकी दिक्कतें इस प्रयास को चुनौती देती नजर आ रही हैं।

यह घटना एक बार फिर डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी निर्भरता पर सवाल खड़े करती है। मरीजों को समय पर सुविधा मिलना सबसे जरूरी है, ऐसे में इस तरह की समस्याओं का जल्द समाधान होना बेहद आवश्यक है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground