जयपुर में टूटी सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइटें और बेसहारा पशु बने नागरिकों की बड़ी परेशानी: लोग खुलकर बता रहे अपने इलाके के हाल
जयपुर में टूटी सड़कें, बंद लाइटें और बेसहारा पशु नागरिकों की परेशानी बने हुए हैं। लोगो की विभिन्न वार्डों से शिकायतें सामने आईं, लेकिन निगम की कार्रवाई नाकाफी।
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर, गुलाबी शहर की सुंदरता और पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, आज बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से जूझ रही है। टूटी-फूटी सड़कें, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें, कीचड़ भरे रास्ते और बेसहारा पशुओं का आतंक – ये वे समस्याएं हैं जो शहर के नागरिकों का जीना मुहाल कर रही हैं। लोगों से उनके इलाकों की समस्याएं साझा करने की अपील की थी। इस कैंपेन के जरिए शहर के विभिन्न वार्डों से जो शिकायतें सामने आईं, वे जयपुर नगर निगम (जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
हर साल करोड़ों का बजट, फिर भी बदहाल सड़कें और अंधेरी गलियां जयपुर नगर निगम (ग्रेटर और हेरिटेज) को हर साल राज्य सरकार और केंद्र से बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए भारी-भरकम बजट मिलता है। इसमें सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस, साफ-सफाई और पशु नियंत्रण जैसे कार्य शामिल हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। नागरिकों का कहना है कि बजट तो आवंटित हो जाता है, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं होता। नतीजतन, बारिश के मौसम में कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़कें, रात में अंधेरी गलियां और बेसहारा पशुओं का हुजूम शहर की तस्वीर को बदनुमा बना रहा है।
ग्रेटर जयपुर के वार्ड 131: कीचड़ में डूबी सड़कें जयपुर ग्रेटर के वार्ड नंबर 131 में स्थिति सबसे विकट है। यहां की सड़कें बारिश के बाद कीचड़ से पूरी तरह पट गई हैं। वाहन फिसल रहे हैं, पैदल चलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी बताते हैं, “हमने कई बार निगम में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। बच्चे स्कूल जाते वक्त गिर पड़ते हैं, बुजुर्गों का बाहर निकलना दूभर है।”
वार्ड 18 और 51: बेसहारा पशुओं का अड्डा इसी तरह वार्ड नंबर 18 और 51 में बेसहारा पशु (मवेशी, कुत्ते) सड़कों पर जमा होकर आतंक मचा रहे हैं। ये पशु न केवल यातायात में बाधा बनते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। एक स्थानीय महिला ने बताया, “रात में कुत्तों के झुंड के कारण अकेले बाहर निकलना खतरनाक हो गया है। निगम की गाड़ी महीनों में एक बार आती है, वो भी खानापूर्ति के लिए।”
हेरिटेज क्षेत्र भी नहीं बचा: वार्ड 8 और 36 में बदइंतजामी जयपुर का हेरिटेज क्षेत्र, जो शहर की शान है, वहां भी हालात कमोबेश एक जैसे हैं। वार्ड नंबर 8 और 36 में स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं। अंधेरे में चोरी और छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ गई हैं। पर्यटक क्षेत्र होने के बावजूद सड़कों पर गड्ढे और कचरे के ढेर आम हैं। एक दुकानदार ने शिकायत की, “पर्यटक आते हैं तो शिकायत करते हैं कि गुलाबी शहर में इतनी गंदगी? निगम वाले सिर्फ फोटो खिंचवाने आते हैं, काम कोई नहीं करता।”
शिकायतें दर्ज, कार्रवाई शून्य नागरिकों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उनकी शिकायतें तो निगम के पोर्टल, हेल्पलाइन और कैंपेन में दर्ज हो जाती हैं, लेकिन उस पर कार्रवाई की कोई समयसीमा नहीं होती। कई लोगों ने बताया कि एक ही समस्या के लिए वे 5-5 बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। “समाधान तभी होता है जब कोई बड़ा अधिकारी खुद इलाके का दौरा कर ले या मीडिया में खबर चल जाए” – यह बात शहर के अधिकांश वार्डों में सुनने को मिली।
निगम की सफाई: बजट की कमी नहीं, प्राथमिकता की कमी जयपुर नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बजट की कोई कमी नहीं है, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही और निगम के अंदर समन्वय की कमी बड़ी समस्या है। स्ट्रीट लाइट्स के लिए अलग ठेका, सड़क मरम्मत के लिए अलग और पशु नियंत्रण के लिए अलग – इन सबके बीच तालमेल नहीं बैठता।
नागरिकों की मांग: तत्काल कार्रवाई और पारदर्शिता
नागरिकों ने मांग की है कि:हर वार्ड में साप्ताहिक निरीक्षण हो और रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में डाली जाए।, शिकायत निवारण के लिए 15 दिन की समयसीमा निर्धारित की जाए। ,बजट उपयोग की पारदर्शी रिपोर्ट हर तीन महीने में जारी हो। , बेसहारा पशुओं के लिए स्थायी गोशाला और नियमित पकड़ अभियान चलाया जाए।