राजस्थान की पहली आधुनिक रिफाइनरी में क्रूड ऑयल की सफल टेस्टिंग: गुजरात से पाइपलाइन के जरिए पहुंचा कच्चा तेल, दो महीने बाद शुरू होगी नियमित सप्लाई
राजस्थान की पहली आधुनिक एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी (पचपदरा, बाड़मेर) में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से 700 किमी लंबी पाइपलाइन के जरिए क्रूड ऑयल की सफल टेस्टिंग हो चुकी है। 10 जनवरी 2026 को पहली खेप पहुंची। स्थानीय मंगला क्रूड (नागाणा) की भी टेस्टिंग सफल रही। दो महीने बाद नियमित सप्लाई शुरू होने की तैयारी है। 9 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली यह रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स बीएस-6 ईंधन और पेट्रोकेमिकल्स (पॉलीप्रोपलीन, पॉलीएथिलीन आदि) बनाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को उद्घाटन करेंगे। इससे राजस्थान को रोजगार, राजस्व और औद्योगिक विकास की बड़ी बढ़ोतरी मिलेगी।
बाड़मेर (राजस्थान) — राजस्थान को अपनी पहली आधुनिक रिफाइनरी मिलने जा रही है। पचपदरा (जिला बालोतरा, बाड़मेर) में बन रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में गुजरात से पाइपलाइन के माध्यम से भेजे गए कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की टेस्टिंग पूरी तरह सफल हो गई है। अब करीब दो महीने बाद इस रिफाइनरी में नियमित क्रूड ऑयल की सप्लाई शुरू होने की तैयारी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल 2026 को इस रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इससे पहले टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम तेज गति से चल रहा है।
रिफाइनरी की मुख्य विशेषताएं
यह भारत की पहली ऐसी एकीकृत परियोजना है जिसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स दोनों साथ-साथ विकसित किए गए हैं।क्षमता: 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (लगभग 180,000 बैरल प्रति दिन)।यहां बीएस-6 मानक का स्वच्छ ईंधन (पेट्रोल, डीजल, केरोसिन) बनाया जाएगा।जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का उपयोग होगा, जिससे पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स में पॉलीप्रोपलीन, पॉलीएथिलीन, बेंजीन, ब्यूटाडीन आदि शामिल होंगे।कुल अनुमानित लागत: लगभग 80,000 करोड़ रुपये।
क्रूड ऑयल सप्लाई की सफल टेस्टिंग
जनवरी 2026 में टेस्टिंग और कमीशनिंग कार्य ने रफ्तार पकड़ी।10 जनवरी 2026 को मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) से अरब मिक्स पाइपलाइन (AMPL) के जरिए क्रूड ऑयल की पहली खेप रिफाइनरी पहुंची।इस 700 किलोमीटर लंबे सफर को पूरा करने में 21 दिन लगे।पाइपलाइन की सफाई और जांच के लिए पहले 21,000 किलोलीटर पानी भेजा गया, जो बफर की तरह काम किया। इसके बाद असली कच्चा तेल पंप किया गया।स्थानीय स्तर पर मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (MPT), नागाणा (95 किमी दूर) से भी क्रूड की टेस्टिंग सफल रही है।
केयरन वेदांता बाड़मेर के MPT से रोजाना करीब 75,000 बैरल कच्चा तेल निकालती है। पहले यह तेल गुजरात के सलाया भेजा जाता था, जहां से इसे रिलायंस और MRPL को सप्लाई किया जाता था। अब राजस्थान रिफाइनरी में स्थानीय क्रूड का उपयोग होगा।केयरन वेदांता और एचपीसीएल के बीच सरकार स्तर पर MoU साइन होने के बाद नियमित सप्लाई शुरू हो जाएगी। इससे राजस्थान सरकार को टैक्स राजस्व में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि पहले यह टैक्स गुजरात को जाता था।
रिफाइनरी के फायदे और तैयारियां
रोजगार: निर्माण चरण में लाखों लोगों को काम मिल चुका है। परिचालन शुरू होने पर बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा।औद्योगिक विकास: रिफाइनरी के आसपास बोरावास और कलावा में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।माल ढुलाई: क्रूड रिफाइनिंग और बायो-प्रोडक्ट्स के उत्पादन से परिवहन व्यवसाय बढ़ेगा।
रेल कनेक्टिविटी: बालोतरा से पचपदरा के बीच बंद पड़ी रेल लाइन को फिर से चालू करने की तैयारी है। हाल ही में इसका सर्वे शुरू हो चुका है। रिफाइनरी साइट तक 12 किलोमीटर नई रेलवे लाइन HRRL की ओर से बिछाई जाएगी।
पाइपलाइन का महत्व
यह पाइपलाइन न केवल मुंद्रा पोर्ट से आयातित क्रूड ला सकेगी, बल्कि स्थानीय मंगला क्रूड को भी कुशलतापूर्वक रिफाइनरी तक पहुंचाएगी। यह आधुनिक ऊर्जा लॉजिस्टिक्स का उत्कृष्ट उदाहरण है।हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं आईजीएनपी चेयरमैन अभय कुमार, प्रमुख सचिव ऊर्जा अजिताभ शर्मा, वित्त सचिव वैभव गालरिया, राजस्व सचिव जोगाराम सहित संभागीय आयुक्त, रेलवे अधिकारी, जिला कलेक्टर और पेट्रोलियम विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
निष्कर्ष
पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र (मारवाड़) की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि औद्योगिक विकास, रोजगार और राजस्व में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन के बाद यह परियोजना पूरी तरह से चालू हो जाएगी और राजस्थान को देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।