राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक विवादों में, पुलिसकर्मियों को धमकाने का कथित ऑडियो वायरल
राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ऑडियो में पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा और धमकी देने का दावा किया जा रहा है, हालांकि मंत्री ने इसे फर्जी बताते हुए अपनी आवाज होने से इनकार किया है।
राजस्थान सरकार में सहकारिता मंत्री और बड़ी सादड़ी से भाजपा विधायक गौतम दक एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ऑडियो ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। वायरल ऑडियो में मंत्री पर पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने, गालियां देने और धमकाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि मंत्री गौतम दक ने इस ऑडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा है कि इसमें सुनाई दे रही आवाज उनकी नहीं है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 25 मई का बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मंत्री गौतम दक अपने एक समर्थक के घर पुलिस पहुंचने और उससे कथित रूप से पैसों की मांग किए जाने की शिकायत से नाराज थे। इसी मामले को लेकर वे सीधे डूंगला थाने पहुंचे।
थाने में पुलिसकर्मियों को बाहर बुलाकर की बातचीत
बताया जा रहा है कि मंत्री ने डूंगला थानाधिकारी शैतान सिंह, कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और कांस्टेबल विष्णु को थाने के बाहर बुलाकर बातचीत की। सोशल मीडिया पर वायरल करीब तीन मिनट के कथित ऑडियो में मंत्री और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।
ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि बातचीत के दौरान कई बार अभद्र और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि मंत्री ने पुलिसकर्मियों को फटकार लगाते हुए अपशब्दों का प्रयोग किया और धमकी भरे लहजे में बात की।
17 बार आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल करने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, वायरल ऑडियो में करीब 17 बार आपत्तिजनक और भद्दे शब्दों का इस्तेमाल सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। यह ऑडियो कथित तौर पर थाने में मौजूद किसी व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है। हालांकि अब तक इस रिकॉर्डिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री ने कहा- आवाज मेरी नहीं
पूरा विवाद सामने आने के बाद मंत्री गौतम दक ने सफाई देते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वायरल ऑडियो पूरी तरह फर्जी है और इसमें सुनाई दे रही आवाज उनकी नहीं है। मंत्री का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के इस तरह की सामग्री फैलाना गलत है और मामले की सच्चाई सामने आने के बाद सब स्पष्ट हो जाएगा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
ऑडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध सकते हैं। वहीं पुलिस विभाग में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा बनी हुई है।
फिलहाल वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक जांच या पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले पर सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई हैं।