सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार क्यों बने CM? जानिए ‘सीक्रेट डील’ से लेकर जातीय समीकरण तक पूरा गणित
कर्नाटक में कांग्रेस ने चुनाव से करीब 23 महीने पहले मुख्यमंत्री बदलते हुए सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को आगे किया है।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हटाकर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को सत्ता सौंपने का फैसला किया है। कांग्रेस के इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
77 वर्षीय सिद्धारमैया की जगह अब 64 वर्षीय डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभालेंगे। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब अगले विधानसभा चुनाव में अभी करीब 23 महीने बाकी हैं। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की रणनीतिक चाल मान रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और ओबीसी नेतृत्व की अनदेखी के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
बैकस्टोरी: कैसे शुरू हुआ CM पद का विवाद?
मई 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की थी। 224 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।
इस जीत के पीछे दो बड़े चेहरे थे—
- सिद्धारमैया की सोशल इंजीनियरिंग
- डीके शिवकुमार का संगठन और चुनाव प्रबंधन
लेकिन सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान शुरू हो गई। कांग्रेस हाईकमान को कई दिनों तक लगातार बैठकों और बातचीत के बाद समझौता कराना पड़ा। आखिरकार सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया गया।
उसी समय राजनीतिक गलियारों में “ढाई-ढाई साल” के फॉर्मूले की चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि कांग्रेस ने कभी इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।
क्या थी ‘सीक्रेट डील’?
राजनीतिक सूत्रों और कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक, 2023 में दिल्ली में हुई हाईलेवल मीटिंग में तय हुआ था कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे।
हालांकि उस समय इस समझौते को सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन समय बीतने के साथ डीके शिवकुमार समर्थक लगातार इस कथित डील को लागू करने का दबाव बनाते रहे।
सिद्धारमैया CM पद छोड़ने को तैयार नहीं थे
जब मई 2026 में सिद्धारमैया सरकार के तीन साल पूरे हुए तो सत्ता परिवर्तन की चर्चा फिर तेज हो गई। कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाया।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सिद्धारमैया को राज्यसभा और राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका देने का प्रस्ताव दिया गया। साथ ही उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को कैबिनेट में शामिल करने की भी चर्चा हुई।
हालांकि शुरुआत में सिद्धारमैया सत्ता छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने अपने समर्थक मंत्रियों और विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन भी किया। लेकिन आखिरकार हाईकमान के दबाव और राजनीतिक संतुलन के चलते उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
कांग्रेस ने चुनाव से पहले CM क्यों बदला?
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई बड़े कारण हैं—
2028 चुनाव की तैयारी
राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय के लिए कर्नाटक में मजबूत नेतृत्व चाहते हैं। 2028 तक सिद्धारमैया करीब 80 साल के हो जाएंगे, जबकि डीके शिवकुमार अपेक्षाकृत युवा और आक्रामक नेता माने जाते हैं।
एंटी-इंकम्बेंसी कम करना
सिद्धारमैया सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फैसलों को लेकर कई आरोप लगे। मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) विवाद में उनके परिवार का नाम भी सामने आया। कांग्रेस चाहती है कि समय रहते नेतृत्व बदलकर सरकार के खिलाफ बढ़ रही नाराजगी को कम किया जाए।
वोक्कालिगा वोट बैंक को साधना
डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिसकी कर्नाटक में लगभग 15% आबादी है। यह समुदाय खासतौर पर ओल्ड मैसूर क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाता है। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि यह वोट बैंक JDS और बीजेपी की तरफ पूरी तरह खिसक जाए।
डीके शिवकुमार की संगठन क्षमता
डीके शिवकुमार को कांग्रेस का “संकटमोचक” माना जाता है। चुनाव प्रबंधन, फंडिंग और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है। कई राज्यों में कांग्रेस के संकट के समय उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पार्टी में बगावत रोकना
कांग्रेस हाईकमान जानता था कि सिद्धारमैया के पास बड़ा ओबीसी और AHINDA वोट बैंक है। इसलिए बदलाव धीरे-धीरे और सम्मानजनक तरीके से किया गया ताकि पार्टी में टूट या बगावत की स्थिति न बने।
बीजेपी को मिले दो बड़े मुद्दे
अब बीजेपी कांग्रेस को दो बड़े मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है—
OBC नेता की अनदेखी
बीजेपी यह नैरेटिव बना सकती है कि कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े ओबीसी चेहरे को हटाकर “हाईकमान की पसंद” को मुख्यमंत्री बनाया है।
सिद्धारमैया AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा, दलित) राजनीति के सबसे बड़े चेहरे माने जाते हैं। यही वोट बैंक कांग्रेस की जीत की बड़ी वजह रहा।
भ्रष्टाचार के आरोप
डीके शिवकुमार पर ED, CBI और इनकम टैक्स से जुड़े कई मामले चल चुके हैं। बीजेपी इन मामलों को भ्रष्टाचार और “फंड मैनेजर राजनीति” के तौर पर पेश कर सकती है।
क्या कांग्रेस को होगा नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कांग्रेस को वोक्कालिगा वोटर्स में मजबूती मिलेगी। वहीं कुछ का मानना है कि इससे OBC और दलित वोटर्स नाराज हो सकते हैं।
कांग्रेस अब इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए 2 या 3 डिप्टी सीएम बनाने पर विचार कर रही है। इसमें दलित और लिंगायत समुदाय के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—
- वोक्कालिगा वोटर्स को एकजुट रखना
- AHINDA वोट बैंक को नाराज न होने देना
- बीजेपी और JDS के जातीय समीकरण का मुकाबला करना
- भ्रष्टाचार के आरोपों से राजनीतिक नुकसान रोकना
आगे क्या?
अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक में डीके शिवकुमार को आधिकारिक तौर पर नेता चुना जाएगा। इसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है। कर्नाटक की राजनीति में यह बदलाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है।