राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यौन अपराध मामलों में पीड़िता की फोटो-वीडियो अब सीलबंद लिफाफे में ही पेश होगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पीड़ित महिलाओं की निजी, अश्लील फोटो या वीडियो अब केवल सीलबंद लिफाफे या पासकोड-लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही अदालत में पेश किए जाएंगे।

May 29, 2026 - 12:35
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यौन अपराध मामलों में पीड़िता की फोटो-वीडियो अब सीलबंद लिफाफे में ही पेश होगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने महिलाओं की निजता और गरिमा की रक्षा को लेकर एक अहम और रिपोर्टेबल जजमेंट सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता की निजी, अश्लील फोटो और वीडियो अब खुले तौर पर अदालत में पेश नहीं किए जा सकेंगे। हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे फोटो-वीडियो केवल सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) या पासकोड-लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही अदालत के समक्ष पेश किए जाएं। यह आदेश जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान दिया।

कोर्ट बोली- ट्रायल शर्मिंदा करने का जरिया नहीं बन सकता

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आजकल जमानत याचिकाओं, आपराधिक रिवीजन, अपील और अन्य मामलों में आरोपी या पुलिस पीड़िता की निजी तस्वीरें और वीडियो सीडी, पेन ड्राइव या दस्तावेजों के साथ खुले तौर पर पेश कर रही है। कोर्ट ने कहा कि इससे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने और फोटो-वीडियो वायरल होने का खतरा बना रहता है, जो किसी भी महिला के वर्तमान, भविष्य और वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकता है। अदालत ने साफ कहा कि कानूनी प्रक्रिया किसी महिला को अपमानित करने या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने का जरिया नहीं बन सकती।

अनुच्छेद 21 का हवाला

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा “जब जांच ही अपमान में बदल जाए और अदालत की प्रक्रिया सार्वजनिक शर्मिंदगी का माध्यम बन जाए, तो यह व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।”

सहमति साबित करने के नाम पर निजी तस्वीरें पेश करने पर नाराजगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में आरोपी और उनके वकील यह साबित करने के लिए कि संबंध सहमति से थे, महिला की निजी तस्वीरें और वीडियो अदालत और जांच अधिकारियों के सामने खुले तौर पर पेश कर देते हैं। अदालत ने इसे महिला की निजता पर सीधा हमला बताया। कोर्ट ने कहा- “यह न केवल महिला की प्राइवेसी का उल्लंघन है, बल्कि खुली फाइलों के जरिए उसकी पहचान सार्वजनिक करने जैसा भी है।”

सभी अदालतों और थानों को जाएंगे निर्देश

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि यौन अपराधों से संबंधित सभी मामलों की सख्त जांच की जाए, ताकि पीड़िता का नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया डिटेल कहीं भी सार्वजनिक न हो। इसके अलावा अदालत ने रजिस्ट्रार न्यायिक को यह मामला प्रशासनिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरे राजस्थान के लिए स्थायी गाइडलाइन (Standing Order) जारी की जा सके।

पुलिस और प्रशासन को भी आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस महानिदेशक, मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग के निदेशक को भेजने के निर्देश दिए हैं।साथ ही कहा गया है कि राज्य के सभी पुलिस थानों के एसएचओ को भी इस आदेश की जानकारी दी जाए, ताकि भविष्य में पीड़ित महिलाओं की निजता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

महिलाओं की निजता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की निजता, डिजिटल सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में निजी फोटो-वीडियो के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट का यह आदेश भविष्य के मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।

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