जयपुर में जल्द दौड़ेंगी 150 ई-बसें: बगराना-टोडी डिपो से 30 दिन में शुरू होगा संचालन, 6 साल बाद पूरा होगा सपना
जयपुर में इलेक्ट्रिक बस सेवा का इंतजार खत्म होने जा रहा है। बगराना डिपो पर पहली 3 ई-बसें पहुंच चुकी हैं, जबकि अगले 12 दिनों में 72 और बसें आएंगी।
राजधानी जयपुर में लंबे समय से इंतजार कर रहे लोगों को जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा मिलने वाली है। करीब छह साल से योजनाओं और घोषणाओं में अटकी ई-बस परियोजना अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। सोमवार को जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (JCTSL) के बगराना डिपो पर पहली तीन इलेक्ट्रिक बसें पहुंच गईं। इसके साथ ही अगले 12 दिनों में 72 और बसें आने की तैयारी है। अधिकारियों का दावा है कि आगामी 30 दिनों के भीतर जयपुर की सड़कों पर ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी।
पहले चरण में कुल 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इनमें से 75 बसें बगराना डिपो और 75 बसें टोडी डिपो से चलाई जाएंगी। दोनों डिपो पर चार्जिंग स्टेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। आरटीओ रजिस्ट्रेशन और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही बसों का ट्रायल और नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
ड्राइवरों को मिलेगी ट्रेनिंग
ई-बसों के संचालन से पहले ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। करीब एक सप्ताह तक उन्हें इलेक्ट्रिक बसों की तकनीक, चार्जिंग सिस्टम और सुरक्षा मानकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर होगा। इसके तहत ड्राइवर चार्टर्ड मोबिलिटी कंपनी के होंगे, जबकि कंडक्टर JCTSL के रहेंगे। यात्रियों से मिलने वाला राजस्व JCTSL के पास जाएगा।
प्रति किलोमीटर तय हुआ भुगतान
सरकार और कंपनी के बीच तय मॉडल के अनुसार 9 मीटर लंबी बसों के लिए 61 रुपए प्रति किलोमीटर और 12 मीटर बसों के लिए 72 रुपए प्रति किलोमीटर भुगतान किया जाएगा। केंद्र सरकार इसमें क्रमशः 22 और 24 रुपए प्रति किलोमीटर की सब्सिडी देगी। बाकी राशि राज्य सरकार और JCTSL वहन करेंगे।
अधिकारियों के मुताबिक 9 मीटर की बसों को प्रतिदिन 180 किलोमीटर और 12 मीटर बसों को 200 किलोमीटर तक चलाना अनिवार्य होगा। इसकी निगरानी GPS सिस्टम के जरिए की जाएगी।
शहर के कई प्रमुख रूटों पर चलेंगी ई-बसें
बगराना और टोडी डिपो से कुल 17 रूटों पर ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इनमें सांगानेर, चाकसू, एयरपोर्ट, खिरनी फाटक, गोनेर, कालवाड़, गलता गेट, महात्मा गांधी अस्पताल, पत्रकार कॉलोनी और द्वारकापुरी जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
45 लाख आबादी पर सिर्फ 190 बसें
जयपुर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। करीब 45 लाख की आबादी वाले शहर में वर्तमान में सिर्फ 190 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि जरूरत करीब 2500 बसों की बताई जा रही है। ऐसे में ई-बसों के आने से शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिलेगी।
चार्जिंग स्टेशन में देरी से अटका था प्रोजेक्ट
ई-बसों का संचालन चार्जिंग स्टेशन तैयार नहीं होने के कारण लंबे समय से अटका हुआ था। 150 बसों का संचालन सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से शुरू नहीं हो पा रहा था। लगातार उठ रहे सवालों और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद अब विभाग ने काम में तेजी दिखाई है। चार्जिंग स्टेशन तैयार होने के साथ बसों की सप्लाई भी शुरू हो गई है।
प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जयपुर में प्रदूषण और डीजल खर्च दोनों में कमी आने की उम्मीद है। ई-बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल होंगी और शहर के ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ावा देंगी। साथ ही यात्रियों को कम शोर और बेहतर सफर का अनुभव मिलेगा।