5 महीने से अटकी मंत्री की ‘खास’ मांग: आखिर किस अफसर पर अड़ी सरकार? शेखावत-मेवाड़ की चिट्ठियां भी बेअसर

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर द्वारा अपने विशिष्ट सहायक बलवंत सिंह लिग्री को हटाने की मांग 5 महीने बाद भी पूरी नहीं हुई। मंत्री ने उनकी जगह RAS अधिकारी विभु कौशिक को लगाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन हालिया तबादला सूची में भी बदलाव नहीं हुआ। अब इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

May 18, 2026 - 11:50
5 महीने से अटकी मंत्री की ‘खास’ मांग: आखिर किस अफसर पर अड़ी सरकार? शेखावत-मेवाड़ की चिट्ठियां भी बेअसर

राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अपने विशिष्ट सहायक (PA) और RAS अधिकारी बलवंत सिंह लिग्री को हटाना चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब तक उनकी इस मांग पर अमल नहीं किया है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री ने करीब पांच महीने पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर बलवंत सिंह लिग्री की जगह RAS अधिकारी विभु कौशिक को अपने विशिष्ट सहायक के रूप में लगाने की मांग की थी। हालांकि, 13 मई 2026 को जारी 187 RAS अधिकारियों की तबादला सूची में भी लिग्री का नाम नहीं बदला गया।

कौन हैं बलवंत सिंह लिग्री?

बलवंत सिंह लिग्री 2011 बैच के RAS अधिकारी हैं और 7 फरवरी 2024 से स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के विशिष्ट सहायक के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे खेतड़ी, कोटकासिम, सिकराय, तिजारा, आसिंद और नीमराणा जैसे क्षेत्रों में एसडीओ रह चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक मंत्री उनकी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। कहा जा रहा है कि लिग्री नियमों और प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हैं, जिससे मंत्री के करीबी लोग असहज रहते हैं। हालांकि मंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्हें हटाने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई।

मंत्री ने CM को क्या लिखा था?

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 1 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि वर्तमान में राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग में अतिरिक्त निदेशक प्रशासन के पद पर कार्यरत RAS अधिकारी डॉ. विभु कौशिक को उनके विशिष्ट सहायक के पद पर लगाया जाए।

इस पत्र का जवाब मुख्यमंत्री कार्यालय की संयुक्त सचिव (प्रशासनिक सुधार) अंजू राजपाल ने 6 फरवरी 2026 को दिया था। जवाब में कहा गया कि नियमानुसार आगामी कार्रवाई के लिए पत्र अग्रेषित कर दिया गया है।

“मेरा मंत्री से कोई विवाद नहीं” : बलवंत सिंह लिग्री

इस पूरे मामले पर बलवंत सिंह लिग्री ने कहा कि उनका मंत्री से कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं और सरकार जहां भी उनकी पोस्टिंग करेगी, वे वहां काम करेंगे।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से इस मामले पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

कौन हैं विभु कौशिक?

स्वास्थ्य मंत्री जिन विभु कौशिक को अपने विशिष्ट सहायक के रूप में लाना चाहते हैं, वे 2006 बैच के RAS अधिकारी हैं। वसुंधरा राजे सरकार के दौरान वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बाबूलाल वर्मा के विशिष्ट सहायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे जयपुर प्रथम के एसडीओ पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

विभु कौशिक उस समय चर्चा में आए थे, जब अप्रैल 2025 में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की तत्कालीन एमडी आईएएस नेहा गिरी ने उन्हें एक मामले में चार्जशीट जारी की थी।

तबादला सूची में कई बदलाव, लेकिन मंत्री की मांग अधूरी

13 मई को जारी RAS तबादला सूची में सरकार ने कई विवादित और चर्चित अधिकारियों के पद बदले। गोपालन विभाग के निदेशक पंकज कुमार ओझा का तबादला भी किया गया। ओझा विभिन्न विवादों को लेकर चर्चा में रहे थे।

इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री की पसंद के अनुसार उनके विशिष्ट सहायक का तबादला नहीं होना राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती और संतुलन साधने की रणनीति मान रहे हैं।

पहले भी उठती रही हैं अफसरों को हटाने की मांग

राजस्थान में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पसंदीदा अफसर लगाने या हटाने की मांग नई बात नहीं है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने तत्कालीन जोधपुर ग्रामीण एसपी नारायण टोगस को हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।

वहीं राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने तत्कालीन एसपी ममता गुप्ता को निलंबित करने और विभागीय जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को दो पत्र भेजे थे।

हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अब तक ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करने से बचने की रणनीति अपनाई है।

क्या कहते हैं राजनीतिक एक्सपर्ट?

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक महेश चंद शर्मा का कहना है कि तबादले प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। सरकार अपने कामकाज और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए अधिकारियों में बदलाव करती है। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री द्वारा पसंद के अधिकारी की मांग करना सामान्य प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।