अलवर नगर निगम में ठेकेदार की दबंगई! AAO से गाली-गलौच, धक्का-मुक्की कर सरकारी फाइल ले गया
अलवर नगर निगम में सहायक लेखाधिकारी (AAO) के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौच और धक्का-मुक्की का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि ठेकेदार सरकारी फाइल छीनकर ले गया और धमकी भी दी। कई दिन बाद भी मामला दर्ज नहीं होने पर कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी है।
राजस्थान के अलवर नगर निगम में सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता और दबंगई का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। सहायक लेखाधिकारी (AAO) के साथ गाली-गलौच, धक्का-मुक्की और सरकारी फाइल छीनने की घटना के बाद निगम कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होने पर कर्मचारियों ने सोमवार से आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार 13 मई को ठेकेदार प्रवीण चौधरी नगर निगम कार्यालय में सहायक लेखाधिकारी हरीश जैन और वसीम के कमरे में पहुंचा। आरोप है कि वहां उसने दोनों अधिकारियों के साथ गाली-गलौच और धक्का-मुक्की की। इतना ही नहीं, ठेकेदार सरकारी फाइल भी अपने साथ लेकर चला गया।
घटना के बाद उसी दिन कर्मचारी द्वारा कोतवाली थाने में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। बाद में नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका ने भी शुक्रवार शाम को पुलिस को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
AAO हरीश जैन ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार के दबाव में पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है। उनका कहना है कि आरोपी ने राजकार्य में बाधा डाली, सरकारी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार किया और खुलेआम धमकी देकर चला गया।
इस पूरे मामले का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर ठेकेदार प्रवीण चौधरी AAO को धमकाते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहा है, “तेरा इलाज करूंगा, तू लिख लेना,” और दबंगई दिखाते हुए फाइल लेकर बाहर जाता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
हालांकि कोतवाली थाने के कार्यवाहक प्रभारी ओम प्रकाश का कहना है कि उनके पास कोई कर्मचारी या अधिकारी रिपोर्ट दर्ज कराने नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि कोतवाल रमेश सैनी के आने के बाद मामले को देखा जाएगा।
इधर, पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) सहित कई संगठनों ने प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी के साथ अभद्रता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो निगम कर्मचारियों द्वारा आंदोलन तेज किया जाएगा।
फिलहाल मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।