बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन: 363 संतों ने आंखों पर पट्टी बांधकर शुरू किया अनिश्चितकालीन अनशन, मांगें पूरी न होने तक नहीं उठेंगे
बीकानेर में खेजड़ी बचाने की हुंकार! 363 संतों ने आंखों पर पट्टी बांधकर, खाना-पानी छोड़ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। मांग- सख्त ट्री प्रोटेक्शन एक्ट और खेजड़ी कटाई पर रोक, वरना नहीं उठेंगे! अमृता देवी के 363 बलिदान की याद में आज फिर प्रकृति की रक्षा का संकल्प। जय जंबेश्वर!
बीकानेर, राजस्थान: खेजड़ी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ बीकानेर में पर्यावरण प्रेमियों और बिश्नोई समाज का आंदोलन अब उग्र रूप धारण कर चुका है। सोमवार को हुए विशाल महापड़ाव के बाद देर रात प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर के पास बलने बिश्नोई धर्मशाला में महापड़ाव दोबारा शुरू किया। यहां 363 संतों और समाज के लोगों ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। संतों और भक्तों ने खाना (अन्न) त्याग दिया है, जबकि सभी ने आंखों पर पट्टी बांधकर धरने पर बैठकर विरोध जताया है। उनका स्पष्ट संकल्प है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे।
आंदोलन की शुरुआत और घटनाक्रम
आंदोलन की शुरुआत खेजड़ी पेड़ों की कटाई के विरोध में हुई, जो राजस्थान के राज्य वृक्ष होने के साथ-साथ मरुस्थल की जीवनरेखा माने जाते हैं। सोमवार को पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में महापड़ाव चला, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। शाम तक यह महापड़ाव चला, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे और तेज करने का फैसला किया। देर रात सभी लोग पॉलिटेक्निक कॉलेज खाली कर पैदल या वाहनों से कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। कुछ लोग कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
रात में प्रदर्शनकारियों ने बलने बिश्नोई धर्मशाला में डेरा डाला। यहां से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ, जिसमें संतों ने आमरण अनशन की घोषणा की। संत सच्चिदानंद ने बताया कि संतों के साथ बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और भक्त शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि जब तक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता, तब तक एक भी पेड़ नहीं कटना चाहिए।"
मांगें और विरोध का तरीका
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग खेजड़ी सहित सभी पेड़ों के संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाना है। वे चाहते हैं कि खेजड़ी कटाई पर सख्त सजा और जुर्माना हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से आंखों पर पट्टी बांध ली है, जो यह दर्शाता है कि वे "अंधे" होकर भी खेजड़ी की रक्षा के लिए डटे रहेंगे। साथ ही, 363 संतों और कई भक्तों ने खाना-पानी छोड़ दिया है, जो आमरण अनशन का रूप ले चुका है।
ठंडी रात में टेंटों में डटे प्रदर्शनकारी
राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आए हजारों प्रदर्शनकारियों के लिए बिश्नोई धर्मशाला छोटी पड़ गई। बड़ी संख्या में लोग टेंटों में सोए, जहां गद्दे और रजाई उपलब्ध कराई गईं। कड़ाके की ठंड में कई लोगों ने पूरी रात जागकर गुजारी। यह जज्बा अमृता देवी और 363 बलिदानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने खेजड़ी बचाने के लिए अपना जीवन कुर्बान किया था।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्ट्रेट की सुरक्षा के लिए एसटीएफ और आरएसी के जवान तैनात किए गए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है, और गुप्तचर पुलिस भी मौके पर सक्रिय है। सोमवार को कलेक्टर नम्रता वृष्णि और एसपी कावेंद्र सागर महापड़ाव स्थल पर पहुंचे और मौखिक आश्वासन दिया कि बीकानेर में खेजड़ी के पेड़ नहीं कटने दिए जाएंगे। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मंच पर बोलने नहीं दिया और अनशन की घोषणा कर दी।