बीकानेर में गौसेवा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, करोड़ों के बजट वाली गौशाला में सिर्फ 9 बदहाल पशु मिले

बीकानेर के बज्जू क्षेत्र में गौशाला के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। करोड़ों के सरकारी बजट वाली गौशाला में निरीक्षण के दौरान सिर्फ 8–9 पशु मिले, जिनकी हालत बेहद खराब थी। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

Jun 2, 2026 - 14:04
बीकानेर में गौसेवा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, करोड़ों के बजट वाली गौशाला में सिर्फ 9 बदहाल पशु मिले

बीकानेर जिले के बज्जू उपखंड की ग्राम पंचायत गोगड़ियावाला में संचालित कथित “सच्चियाय गौ सेवा मंडल” गौशाला को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गौसेवा और पशु कल्याण के नाम पर करोड़ों रुपये के सरकारी अनुदान के बावजूद मौके पर स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई।

निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

स्थानीय शिकायतों के बाद 15 अप्रैल 2025 को उपखंड अधिकारी राजेश नायक, नायब तहसीलदार और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने अचानक गौशाला का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गौशाला परिसर पर ताला लगा मिला और अंदर जो दृश्य सामने आया, उसने अधिकारियों को हैरान कर दिया।

मौके पर केवल 8 से 9 पशु मौजूद थे, जिनकी हालत बेहद दयनीय थी। कई पशुओं को पर्याप्त चारा और पानी तक उपलब्ध नहीं था। पशु खेळी में गंदा और रुका हुआ पानी पाया गया, जिससे साफ-सफाई और देखभाल की गंभीर कमी उजागर हुई।

करोड़ों के बजट पर सवाल

जानकारी के अनुसार, इस गौशाला को पशुपालन विभाग की योजना के तहत चयनित किया गया था, जिसके तहत लगभग 1.5 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित बताया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत ने इस पूरे सिस्टम और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला संचालक निरीक्षण के समय आसपास के आवारा पशुओं को इकट्ठा कर दिखाता है, ताकि रिकॉर्ड में संख्या अधिक दिखाई जाए। लेकिन बाद में इन पशुओं की उचित देखभाल नहीं की जाती।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि गौसेवा के नाम पर अनुदान की राशि का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है।

प्रशासन ने शुरू की जांच

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाएगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक गौशाला की अनियमितता नहीं है, बल्कि सरकारी अनुदान, पारदर्शिता और पशु कल्याण व्यवस्था की पूरी प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं।

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