'PM मोदी के पास आम पर बोलने का समय है, लेकिन छात्रों पर नहीं', राहुल गांधी का तंज

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने CBSE की 12वीं कक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उत्तर पुस्तिकाओं को आधुनिक स्कैनर की बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया।

Jun 1, 2026 - 17:10
'PM मोदी के पास आम पर बोलने का समय है, लेकिन छात्रों पर नहीं', राहुल गांधी का तंज

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करने के लिए आधुनिक रोबोटिक स्कैनिंग सिस्टम की बजाय मोबाइल फोन का उपयोग किया गया, जिससे मूल्यांकन की गुणवत्ता प्रभावित हुई और हजारों छात्रों के परिणामों पर असर पड़ सकता है।

छात्रों से मुलाकात के बाद उठाया मुद्दा

राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात की जिन्होंने डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत की थी। छात्रों की बात सुनने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए पूरे मामले को सार्वजनिक किया और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।

टेंडर की शर्तों में बदलाव पर सवाल

राहुल गांधी के अनुसार, मई 2025 में जारी CBSE के टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को स्वचालित रोबोटिक स्कैनर से स्कैन करने की शर्त शामिल थी। साथ ही कॉपियों की बाइंडिंग सुरक्षित रखने और कम से कम 300 DPI गुणवत्ता में स्कैनिंग का प्रावधान भी रखा गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2025 में दोबारा जारी किए गए टेंडर से इन महत्वपूर्ण तकनीकी शर्तों को हटा दिया गया, जिससे स्कैनिंग प्रक्रिया की गुणवत्ता प्रभावित हुई और मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।

मोबाइल फोन से स्कैनिंग का आरोप

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में परिवर्तित करने वाली निजी कंपनी ने आधुनिक स्कैनिंग मशीनों की बजाय मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। इसके कारण कई उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें धुंधली हो गईं, कुछ पन्ने स्कैन नहीं हुए और कई मामलों में पूरी कॉपियां सही तरीके से अपलोड नहीं हो सकीं।

राहुल गांधी का कहना है कि ऐसी स्थिति में परीक्षार्थियों के उत्तरों का सही मूल्यांकन होना मुश्किल है, जिससे उनके अंकों और भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता है।

'यह केवल तकनीकी गलती नहीं'

राहुल गांधी ने कहा कि धुंधली प्रतियां, गायब पन्ने और अधूरी स्कैनिंग केवल तकनीकी त्रुटियां नहीं हैं, बल्कि छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाया गया और इसकी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ी।

छात्र शोधकर्ता की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

इस मुद्दे को और बल तब मिला जब छात्र शोधकर्ता सार्थक सिद्धांत की एक रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में ऑनलाइन मूल्यांकन पोर्टल के ठेके और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। राहुल गांधी ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

पारदर्शी जांच की मांग

राहुल गांधी ने कहा कि जिन छात्रों के अंक कथित गड़बड़ियों के कारण प्रभावित हुए हैं, उनके साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने CBSE और केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

इस बीच, मामला सामने आने के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत में बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सभी की नजर अब CBSE और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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