बाड़मेर हत्याकांड: सरकारी टीचर ने पत्नी पर शक में मां, पत्नी और दो बेटियों की हत्या की, 9 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
राजस्थान के बाड़मेर में 2016 में सरकारी टीचर राणाराम ने पत्नी पर शक के चलते अपनी मां, पत्नी और दो बेटियों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। देखभाल कौन करेगा यह सोचकर पूरे परिवार को मार डाला। वारदात के बाद खुद थाने जाकर सरेंडर किया। 9 साल बाद कोर्ट ने चारों हत्याओं के लिए उम्रकैद और 1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में 2016 में हुई एक सनसनीखेज चौहरी हत्याकांड की गूंज अब 9 साल बाद कोर्ट के फैसले से फिर से सुनाई दे रही है। एक सरकारी स्कूल टीचर ने अपनी पत्नी पर शक के चलते न केवल उसकी, बल्कि अपनी बुजुर्ग मां और दो नाबालिग बेटियों की भी बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया और अपना गुनाह कबूल कर लिया। अब बाड़मेर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है, साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
वारदात की पूरी कहानी यह दिल दहला देने वाली घटना 20 अक्टूबर 2016 की रात की है। आरोपी राणाराम (उस समय 44 वर्षीय), जो बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना क्षेत्र में राणासर कलां गांव के निकट कुम्हारों की ढाणी में सरकारी प्राइमरी स्कूल में ग्रेड थर्ड टीचर थे, ने अपनी पत्नी लाली देवी (40 वर्षीय) पर किसी अन्य व्यक्ति से संबंध का शक किया। शक इतना गहरा हो गया कि राणाराम ने रात में परिवार के सोते समय कुल्हाड़ी या किसी भारी हथियार से वार कर सभी की हत्या कर दी।
पीड़ितों में शामिल थे: आरोपी की बुजुर्ग मां पार्वती देवी (70 वर्षीय), पत्नी लाली देवी (40 वर्षीय),बड़ी बेटी संतोष (12 वर्षीय),छोटी बेटी देवी (14 वर्षीय)।राणाराम का इरादा शुरू में केवल पत्नी की हत्या का था, लेकिन उसने कबूल किया कि "पत्नी नहीं रहेगी तो मां और बेटियों की देखभाल कौन करेगा?" इस सोच के चलते उसने पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया। हत्या के बाद वह रात भर लाशों के बीच बैठा रहा और अगली सुबह 21 अक्टूबर 2016 को गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर धोरीमन्ना थाने पहुंच गया।थाने में राणाराम ने पुलिस को कहा, "मैंने अपने परिवार को मार डाला है। चार मर्डर कर दिए हैं, मुझे गिरफ्तार कर लो।" उसके कपड़ों पर खून के धब्बे देखकर पुलिस को पहले तो यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब टीम गांव पहुंची तो मंजर देखकर सभी स्तब्ध रह गए। तीन शव (मां पार्वती, पत्नी लाली और एक बेटी देवी) खून से लथपथ चारपाई पर पड़े थे, जबकि दूसरी बेटी संतोष की लाश आंगन में पड़ी थी।
कैसे खुली वारदात? इधर, राणाराम के चाचा श्रीराम (राणासर निवासी) को सूचना मिली। एक रिटायर्ड फौजी रामधन सुबह उनके घर आए और रोते हुए कहा कि राणाराम उनके पास आया था और कुछ गड़बड़ लग रही है, घर जाकर देखना चाहिए। दोनों जब राणाराम के घर पहुंचे तो खौफनाक मंजर देखकर दंग रह गए। इसके बाद चाचा ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।
कोर्ट में क्या हुआ? केस की सुनवाई बाड़मेर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजिताभ आचार्य की अदालत में चली। सरकारी वकील दामोदर कुमार चौधरी ने मजबूत केस पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से:19 गवाह पेश किए गए,79 दस्तावेज सबूत के तौर पर प्रस्तुत किए गए,18 भौतिक प्रमाण (आर्टिकल) कोर्ट में रखे गए।लंबी सुनवाई के बाद 22 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने राणाराम को चारों हत्याओं का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। यह फैसला परिवार के लिए न्याय की एक किरण है, लेकिन इस क्रूर वारदात ने पूरे क्षेत्र में सदमा पहुंचाया था।