अजमेर के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल का विवादास्पद बयान: 'पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई है, 12 घंटे पहले अस्तित्व में आया'
अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने ब्यावर में राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 14 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आया, जबकि भारत 15 अगस्त को, इसलिए पाकिस्तान 12 घंटे बड़ा है और हमारा 'बड़ा भाई' है। आजादी के समय सिर्फ गांधी, जिन्ना और अंबेडकर ही प्रमुख नेता थे, नेहरू का नाम नहीं लिया। उन्होंने राजनीति द्वारा समाज को तोड़ने और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर भी टिप्पणी की, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई।
राजस्थान के अजमेर स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. मनोज बेहरवाल ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दिए गए अपने बयानों से चर्चा और विवाद का विषय बन गए हैं। उन्होंने आजादी के समय की घटनाओं और भारत-पाकिस्तान के उदय को लेकर कुछ ऐसे विचार व्यक्त किए, जिन्होंने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
यह बयान 23 और 24 जनवरी 2026 को ब्यावर (भीलवाड़ा जिला) के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया। सम्मेलन का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System - IKS) पर केंद्रित था। इसमें भारत के 7 राज्यों, राजस्थान के 20 से अधिक जिलों के प्रतिभागियों के अलावा तीन विदेशी देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।
मुख्य अतिथि के रूप में दिए गए बयान
24 जनवरी को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधन देते हुए प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने कहा:14 अगस्त 1947 को भारत के राजनीतिक पटल पर और विश्व पटल पर एक देश का नाम आया – वह था पाकिस्तान।15 अगस्त 1947 को सुबह दस या साढ़े दस बजे भारत का उदय हुआ।इस तरह पाकिस्तान हमसे 12 घंटे बड़ा है, इसलिए पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई है।उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान को पहले "घुट्टी" दी गई, उसके गीत गाए गए, उसे नहलाया-धुलाया गया और सब कुछ कराया गया, जिसके कारण वह बड़ा भाई बन गया। भारत बाद में अस्तित्व में आया।
आजादी के समय के नेताओं पर टिप्पणी
बेहरवाल ने आजादी के दौर के लोकप्रिय नेताओं का जिक्र करते हुए कहा:जब आजादी मिली, तो देश में सिर्फ तीन नेता थे – महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और डॉ. भीमराव अंबेडकर।ध्यान रखें, यहां नेहरू का नाम नहीं था। ये तीन ही नेता सबसे लोकप्रिय थे।उन्होंने एक घटना का जिक्र किया – विदेशी पत्रकार आजादी के समय इंटरव्यू के लिए आए। पहले वे गांधी जी के पास गए, लेकिन रात के 8 बज चुके थे और गांधी जी सो चुके थे। फिर करीब 10 बजे जिन्ना के पास गए, लेकिन वे बाहर गए या सो गए थे। आखिरकार रात करीब 12 बजे अंबेडकर के पास पहुंचे। अंबेडकर हिंदू कोड बिल की तैयारी कर रहे थे। पत्रकारों ने पूछा कि आप अभी तक जाग रहे हैं? इस पर अंबेडकर ने जवाब दिया – "उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं। मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है।" उन्होंने कहा कि समाज और देश एक ही हैं – यही भारतीय ज्ञान परंपरा है।
पाकिस्तान को मिली आर्थिक मदद और अन्य टिप्पणियां
बेहरवाल ने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया और सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा। लेकिन बाद में भारत ने उसे 45 करोड़ रुपये दिए, ताकि वह अपनी जिंदगी जी सके। हालांकि, पाकिस्तान ने इन पैसों को आतंकवाद पर "सट्टा" लगाने में बर्बाद कर दिया।उन्होंने राजनीति पर भी टिप्पणी की:2014 के बाद पहली बार भारतीय राजनीति और समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का कनेक्शन हुआ है।इससे पहले राजनीति समाज को तोड़ने का काम करती थी, जिससे समाज परेशान था और नहीं जानता था कि क्या करना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार
प्रिंसिपल ने भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे BKS (Bharatiya Knowledge System) होना चाहिए, I (Indian) हटाकर B (Bharatiya) लगाना चाहिए। उन्होंने अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा – "जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, उसका पतन निश्चित है।" पढ़े-लिखे लोगों का समाज से कनेक्शन कट चुका है, इसलिए उन्हें समाज के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।
सम्मेलन के अन्य विवरण
मुख्य मेहमान: प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल,विशिष्ट अतिथि: सीए अंकुर गोयल,मुख्य वक्ता: राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रोफेसर एम.एल. शर्मा,अध्यक्षता: महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रेखा मंडोवरा ने की,समन्वयक: डॉ. दुष्यंत पारीक (संयोजक) और डॉ. मानक राम सिंगारिया (सह-संयोजक),संचालन: प्रोफेसर हरीश कुमार (हिंदी) और श्वेता स्वामी (अंग्रेजी)