ठेले पर कपड़े प्रेस करने वाला शख्स और 598 करोड़ का ट्रांजेक्शन! नोटिस मिलते ही बिगड़ी तबीयत… क्या है पूरा मामला? जानिए

दिनभर मेहनत कर परिवार पालने वाला एक शख्स अचानक 598 करोड़ के लेनदेन के नोटिस में फंस गया। मामला सामने आते ही तबीयत बिगड़ी और बड़ा खुलासा हुआ। आखिर कैसे हुआ ये खेल? पढ़ें पूरी खबर।

Apr 8, 2026 - 22:52
ठेले पर कपड़े प्रेस करने वाला शख्स और 598 करोड़ का ट्रांजेक्शन! नोटिस मिलते ही बिगड़ी तबीयत… क्या है पूरा मामला? जानिए

राजस्थान के अजमेर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। ठेले पर कपड़े प्रेस कर अपने परिवार का गुजारा करने वाले एक साधारण व्यक्ति को अचानक आयकर विभाग से 598 करोड़ रुपये के लेनदेन का नोटिस मिला।

यह नोटिस मिलने के बाद व्यक्ति की हालत इतनी बिगड़ गई कि उनका शुगर लेवल करीब 500 तक पहुंच गया और उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया।

साधारण जिंदगी, लेकिन करोड़ों का नोटिस

रामनगर क्षेत्र में रहने वाले जितेंद्र बाड़ोलिया रोजाना ठेले पर कपड़े प्रेस कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका कहना है कि उनका किसी भी बड़े कारोबार या करोड़ों के लेनदेन से कोई लेना-देना नहीं है।

हीरे-जवाहरात के कारोबार से जुड़ा मामला

आयकर विभाग के नोटिस में जिन ट्रांजेक्शन्स का जिक्र है, वे हीरे-जवाहरात के व्यापार से जुड़े बताए जा रहे हैं। यह बात सुनकर जितेंद्र और उनका परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।

पैन कार्ड के दुरुपयोग का शक

जितेंद्र के वकील राकेश ठाडा के मुताबिक, उनके पैन कार्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।

जितेंद्र ने बताया कि करीब दो साल पहले उनका पैन कार्ड खो गया था, जिसके बाद किसी ने उनके नाम पर बैंक खाता खोलकर जीएसटी नंबर तक जारी करवा लिया।

फर्जी कंपनी और करोड़ों का खेल

जांच में सामने आया कि पाली के एक डायमंड कारोबारी ने जितेंद्र के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सूरत में ‘मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्म खोल ली।

इसी फर्म के जरिए महज तीन महीनों में करीब 600 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया।

पुलिस जांच शुरू

इस मामले को लेकर गंज थाना पुलिस में FIR दर्ज कराई गई है। पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।

बैंकिंग सिस्टम पर भी सवाल

आयकर विभाग ने संबंधित बैंक मैनेजर को भी नोटिस भेजा है। सवाल उठ रहा है कि जब खाते में इतने बड़े स्तर पर ट्रांजेक्शन हो रहे थे, तो समय रहते इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।

यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुए संभावित धोखाधड़ी को उजागर करता है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और KYC प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground