9 महीने में फेल हुआ Starbucks का AI सिस्टम, दूध-सिरप तक पहचान नहीं पाया

स्टारबक्स ने अपने स्टोर्स में इस्तेमाल हो रहे AI इन्वेंट्री सिस्टम को बंद कर दिया है। कंपनी का कहना है कि सिस्टम लगातार गलतियां कर रहा था, जिसके बाद अब इन्वेंट्री मैनेजमेंट का काम दोबारा कर्मचारियों को सौंप दिया गया है।

May 24, 2026 - 11:29
9 महीने में फेल हुआ Starbucks का AI सिस्टम, दूध-सिरप तक पहचान नहीं पाया

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई कंपनियों को अब इसकी सीमाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका की मशहूर कॉफी कंपनी स्टारबक्स ने अपने स्टोर्स में लागू किए गए AI इन्वेंट्री सिस्टम को बंद करने का फैसला लिया है। यह सिस्टम केवल 9 महीने पहले ही लॉन्च किया गया था, लेकिन लगातार तकनीकी गलतियों और खराब प्रदर्शन के कारण कंपनी को इसे हटाना पड़ा।

क्या था Starbucks का AI सिस्टम?

स्टारबक्स ने अपने स्टोर्स में इन्वेंट्री मैनेजमेंट को आसान और तेज बनाने के लिए AI आधारित सिस्टम शुरू किया था। इस तकनीक का उद्देश्य दूध, सिरप, कॉफी सामग्री और अन्य बेवरेज प्रोडक्ट्स की ऑटोमैटिक गिनती करना था।

स्टोर कर्मचारी टैबलेट की मदद से शेल्फ स्कैन करते थे और AI कैमरा व LIDAR तकनीक की सहायता से सिस्टम सामान की पहचान करता था। कंपनी को उम्मीद थी कि इससे स्टॉक मैनेजमेंट ज्यादा सटीक और तेज हो जाएगा।

AI ने की लगातार गलतियां

हालांकि, शुरुआत से ही इस सिस्टम में कई दिक्कतें सामने आने लगीं। रिपोर्ट्स के अनुसार AI कई बार अलग-अलग प्रकार के दूध को सही तरीके से पहचान नहीं पाता था। कुछ मामलों में वह सिरप और अन्य प्रोडक्ट्स की गिनती में भी गलती कर देता था।

कई बार सिस्टम शेल्फ पर मौजूद कुछ सामान को पहचान ही नहीं पाता था, जिससे स्टॉक रिपोर्ट गलत बनने लगी। इसका असर स्टोर की सप्लाई और रीस्टॉकिंग प्रक्रिया पर भी पड़ा।

इंसानों को वापस सौंपा गया काम

लगातार आ रही तकनीकी समस्याओं के बाद स्टारबक्स ने AI सिस्टम को हटाने का फैसला किया। कंपनी का कहना है कि अब सभी स्टोर्स में इन्वेंट्री गिनने का तरीका एक जैसा रखा जाएगा और फिलहाल यह जिम्मेदारी कर्मचारियों द्वारा ही संभाली जाएगी।

स्टारबक्स ने बताया कि कंपनी अभी सप्लाई चेन को बेहतर बनाने और रोजाना तेजी से रीस्टॉकिंग करने पर काम कर रही है। हालांकि AI तकनीक को पूरी तरह छोड़ने की बात नहीं कही गई है, लेकिन फिलहाल इंसानी निगरानी को ज्यादा भरोसेमंद माना जा रहा है।

AI पर बढ़ी नई बहस

इस फैसले के बाद AI तकनीक की विश्वसनीयता को लेकर फिर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI कई क्षेत्रों में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन पूरी तरह इंसानों की जगह लेना अभी भी आसान नहीं है।

स्टारबक्स का यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि टेक्नोलॉजी कितनी भी एडवांस क्यों न हो, कई परिस्थितियों में इंसानी समझ और अनुभव अब भी ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।