पूर्व मुख्यमंत्री व भूपिंदर सिंह हुड्डा मोहनगढ़ पहुंच कर्नल सोनाराम चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जैसलमेर के मोहनगढ़ में कर्नल सोनाराम चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कर्नल सोनाराम के निधन के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जैसलमेर, जोधपुर, और बाड़मेर के सैकड़ों नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए। गहलोत और हुड्डा ने उनके परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। कर्नल सोनाराम, बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और सेना के सम्मानित अधिकारी, ने क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Aug 31, 2025 - 17:43
पूर्व मुख्यमंत्री व भूपिंदर सिंह हुड्डा मोहनगढ़ पहुंच कर्नल सोनाराम चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की.

जैसलमेर, 31 अगस्त 2025: राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता कर्नल सोनाराम चौधरी के निधन के बाद उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कर्नल सोनाराम के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और ढांढस बंधाया। इस भावुक अवसर पर जैसलमेर, जोधपुर, और बाड़मेर के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे मोहनगढ़ में शोक और श्रद्धांजलि का माहौल रहा।

कर्नल सोनाराम चौधरी का निधन और अंतिम संस्कार 

कर्नल सोनाराम चौधरी का निधन 20 अगस्त 2025 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। वह 84 वर्ष के थे। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्होंने खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल पहुंचाया था, जहां उनका ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी सेहत के बारे में अपडेट भी साझा किया था, लेकिन रात 11:15 बजे के करीब उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने पश्चिमी राजस्थान में शोक की लहर दौड़ा दी। 22 अगस्त को उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी विमला चौधरी, पुत्र डॉ. रमन चौधरी, और अन्य परिजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। 

31 अगस्त 2025 को मोहनगढ़ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्नल सोनाराम को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सेना में 25 साल की सेवा और राजनीति में अपने योगदान से समाज को नई दिशा दी। गहलोत ने बताया कि वह और कर्नल सोनाराम सांसद और विधायक के रूप में एक साथ काम कर चुके थे, और उनकी सादगी और जनसेवा की भावना हमेशा प्रेरणादायक रहेगी। गहलोत ने कर्नल के पुत्र डॉ. रमन चौधरी से मुलाकात कर परिवार को सांत्वना दी।

 हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो कर्नल सोनाराम के करीबी मित्र थे, ने भी उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। हुड्डा ने कहा कि कर्नल सोनाराम ने न केवल राजस्थान बल्कि देश की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। उनकी मुलाकात कर्नल के परिवार से बेहद भावुक रही, और उन्होंने परिवार को इस दुख की घड़ी में धैर्य रखने की प्रेरणा दी।

नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

श्रद्धांजलि सभा में जैसलमेर, जोधपुर, और बाड़मेर के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, बायतु विधायक हरीश चौधरी, सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, और जैसलमेर पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल जैसे कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इन नेताओं ने कर्नल सोनाराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। मोहनगढ़ के बाजार इस दिन बंद रहे, और स्थानीय लोगों ने अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि दी।

कर्नल सोनाराम का राजनीतिक और सामाजिक योगदान 

कर्नल सोनाराम चौधरी ने भारतीय सेना में 25 वर्ष तक सेवा दी और 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1994 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1996, 1998, 1999, और 2014 में बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद चुने गए। वह 2008 में बायतु विधानसभा सीट से विधायक भी रहे। किसानों की आवाज के रूप में जाने जाने वाले कर्नल सोनाराम ने पश्चिमी राजस्थान में कृषि, ग्रामीण विकास, और सामाजिक उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव ने उन्हें क्षेत्र में एक कद्दावर नेता बनाया। 

शोक की लहर और समर्थकों का दुख

कर्नल सोनाराम के निधन से बाड़मेर, जैसलमेर, और जोधपुर में शोक की लहर है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास और सामाजिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र के सामने श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। 

कर्नल सोनाराम चौधरी के निधन ने राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा शून्य छोड़ दिया है। उनकी श्रद्धांजलि सभा में दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि वह सभी के लिए प्रेरणास्रोत थे, कर्नल सोनाराम की स्मृति और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।