मुंबई के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट के को-प्रोड्यूसर और वेंडर गिरफ्तार: उदयपुर के डॉक्टर से 30 करोड़ रुपये की ठगी, 200 करोड़ कमाई का लालच देकर हड़पा धन
बॉलीवुड निर्देशक विक्रम भट्ट के को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और वेंडर संदीप त्रिलोभन को उदयपुर के एक डॉक्टर से फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने 200 करोड़ कमाई का लालच देकर डॉक्टर से पैसे ऐंठे। दोनों को उदयपुर कोर्ट ने 23 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
उदयपुर/मुंबई, 19 नवंबर 2025: बॉलीवुड के जाने-माने डरावनी फिल्मों के निर्देशक विक्रम भट्ट के करीबी सहयोगी एक बड़े घोटाले के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। मुंबई पुलिस ने एक उदयपुर के डॉक्टर से फिल्म निर्माण के नाम पर 30 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में विक्रम भट्ट के को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और एक वेंडर संदीप त्रिलोभन को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला न केवल धोखाधड़ी का है, बल्कि पीड़ित को 200 करोड़ रुपये की कमाई का झांसा देकर उसका विश्वास जीतने का भी। पुलिस का दावा है कि यह ठगी एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री के नाम का दुरुपयोग किया गया।
घटना का पूरा विवरण: कैसे हुआ धोखा? पुलिस जांच के अनुसार, यह सारा कांड पिछले कुछ महीनों से चल रहा था। उदयपुर के एक प्रमुख डॉक्टर, जिनकी पहचान अभी गोपनीय रखी गई है, को मुंबई से संपर्क किया गया। संपर्क करने वाले थे विक्रम भट्ट के को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और उनका सहयोगी वेंडर संदीप त्रिलोभन। दोनों ने डॉक्टर को एक आकर्षक फिल्म प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया, जिसमें विक्रम भट्ट का नाम प्रमुखता से लिया गया। आरोपियों ने दावा किया कि यह एक बड़ी बजट वाली फिल्म है, जो सुपरहिट होने वाली है। उन्होंने डॉक्टर को आश्वासन दिया कि यदि वे प्रोडक्शन में निवेश करेंगे, तो उनकी राशि दोगुनी-तिगुनी हो जाएगी। विशेष रूप से, 200 करोड़ रुपये की कमाई का लालच देकर डॉक्टर को उकसाया गया। डॉक्टर ने विश्वास करते हुए कुल 30 करोड़ रुपये हस्तांतरित कर दिए। यह राशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई, जिसमें प्रोडक्शन कॉस्ट, लोकेशन शूटिंग और अन्य खर्चों का हवाला दिया गया। हालांकि, फिल्म का कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। न कोई स्क्रिप्ट फाइनल हुई, न कास्टिंग, और न ही कोई शूटिंग। डॉक्टर को बार-बार टालमटोल के जवाब मिलते रहे। आखिरकार, संदेह होने पर उन्होंने जांच शुरू की और मामला मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के पास पहुंचा। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी विक्रम भट्ट के नाम का इस्तेमाल केवल विश्वसनीयता के लिए कर रहे थे, और वास्तविक निर्देशक को इस धोखाधड़ी की कोई जानकारी नहीं थी।
गिरफ्तारियां: मुंबई से उदयपुर तक सिकुड़ता जाल मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल छापेमारी शुरू कर दी। मंगलवार (19 नवंबर 2025) को दोनों मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए:महबूब अंसारी: मीरा रोड, ठाणे (मुंबई) का निवासी। वह विक्रम भट्ट के को-प्रोड्यूसर के रूप में जाना जाता है और कई फिल्म प्रोजेक्ट्स में सहयोगी रहा है। पुलिस के अनुसार, ठगी का मास्टरमाइंड यही है, जिसने डॉक्टर से सीधा संपर्क रखा और फंड्स ट्रांसफर करवाए। संदीप त्रिलोभन: राणानगर, रतिबंदर (पुरानी मुंबई-पुणे हाईवे) का निवासी। वह फिल्म प्रोडक्शन का वेंडर है, जो सेट मटेरियल, लोकेशन और अन्य लॉजिस्टिक्स का काम संभालता है। संदीप ने ठगी में सहयोग किया, जिसमें फर्जी बिल और रसीदें तैयार करना शामिल था।
दोनों को मंगलवार शाम को उदयपुर लाया गया, जहां स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने पुलिस को 23 नवंबर तक रिमांड देने का आदेश दिया है। इस दौरान पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस ने बताया कि दोनों के पास से कुछ दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट्स और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जो ठगी के सबूत के रूप में काम आएंगे।
अन्य आरोपी और आगे की जांच; पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह गिरोह बड़ा है और इसमें अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। मामले में विक्रम भट्ट के नाम के अलावा कुछ अन्य फिल्मी हस्तियों के नाम भी जांच के दायरे में हैं, हालांकि अभी कोई और गिरफ्तारी नहीं हुई है। EOW ने कहा कि अगले 48 घंटों में अन्य संदिग्धों की तलाश तेज कर दी जाएगी। डॉक्टर की शिकायत पर दर्ज FIR में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे धाराओं के तहत केस दर्ज है। यदि जांच सही दिशा में चली, तो 30 करोड़ रुपये की वसूली संभव हो सकती है। पुलिस ने पीड़ित डॉक्टर को सुरक्षा का भरोसा दिया है और उन्हें सलाह दी है कि भविष्य में ऐसे निवेश से पहले पूरी जांच करें।
फिल्म इंडस्ट्री पर असर: एक चेतावनी यह घटना बॉलीवुड में निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है। विक्रम भट्ट, जो 'राहुल' और '1920' जैसी हिट फिल्मों के लिए मशहूर हैं, ने इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वे खुद इस धोखाधड़ी से अनजान थे और सहयोगी के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेंगे। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फर्जी प्रोजेक्ट्स से छोटे निवेशकों को बचाने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है।