UAE में जंग की फर्जी खबर फैलाने वाले 19 भारतीय समेत 35 गिरफ्तार: AI से बने मिसाइल हमले के वीडियो वायरल किए, पैनिक फैलाने का आरोप – 1 साल जेल और 1 लाख दिरहम तक जुर्माना
यूएई ने मिडिल ईस्ट जंग (इजरायल-अमेरिका-ईरान) के बीच सोशल मीडिया पर AI से बने फर्जी वीडियो और भ्रामक क्लिप शेयर करने वाले 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया। इनमें 19 भारतीय शामिल। आरोपियों पर पैनिक फैलाने और प्रोपेगैंडा का आरोप, 1 साल जेल व भारी जुर्माना।
दुबई/अबू धाबी, 17 मार्च 2026: मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रही तनावपूर्ण जंग के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सख्त कार्रवाई की है। यूएई की अटॉर्नी जनरल ऑफिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक, फर्जी और AI से बने वीडियो पोस्ट करने वाले 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। इनमें 19 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। आरोपियों पर यूएई पर मिसाइल हमले, विस्फोट और ड्रोन अटैक के फर्जी क्लिप वायरल करने, पब्लिक में पैनिक फैलाने और दुश्मन देशों की प्रोपेगैंडा फैलाने का आरोप है।
यूएई की आधिकारिक न्यूज एजेंसी WAM के मुताबिक, यह कार्रवाई दो चरणों में हुई। पहले चरण में 10 लोगों (जिनमें 2 भारतीय) को नामित किया गया। दूसरे चरण में 25 लोगों (जिनमें 17 भारतीय) की सूची जारी हुई। कुल 35 आरोपी अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। इनमें विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं – पाकिस्तान, नेपाल, फिलीपींस, मिस्र आदि। यूएई साइबर क्राइम लॉ के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल की जेल और 1 लाख दिरहम (लगभग 23 लाख रुपये) तक का भारी जुर्माना लग सकता है।
अधिकारियों ने आरोपियों को तीन ग्रुप में बांटा है। पहला ग्रुप – असली वीडियो शेयर कर गलत कमेंट्री करने वाले। दूसरा – AI टूल्स से फर्जी वीडियो बनाने वाले। तीसरा – दुश्मन देशों की सेना को महिमामंडित करने वाले प्रोपेगैंडा फैलाने वाले। इन क्लिप्स में यूएई के शहरों पर मिसाइल हमले, दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक और फुजैरा में विस्फोट जैसे फर्जी दावे किए गए थे। कुछ वीडियो में डिफेंस सिस्टम की तस्वीरें भी शेयर की गईं, जो सुरक्षा को खतरे में डालती हैं।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब ईरान की तरफ से यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका बढ़ गई थी। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ उड़ानें अस्थायी रूप से रोकी गई थीं। यूएई सरकार ने पहले ही नागरिकों को चेतावनी दी थी कि जंग से जुड़े किसी भी वीडियो या फोटो को शेयर न करें, क्योंकि इससे पब्लिक में अफरा-तफरी फैल सकती है और देश की सुरक्षा उजागर हो सकती है। अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने कहा, “फेक न्यूज, हैट स्पीच और डिफेमेटरी कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबर भारत में भी चर्चा का विषय बन गई है। इनमें ज्यादातर यूएई में काम करने वाले या रहने वाले भारतीय हैं, जो सोशल मीडिया पर एक्टिव थे। भारतीय दूतावास ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि कांसुलर मदद के लिए संपर्क किया जा रहा है। भारत और यूएई के बीच मजबूत संबंध हैं – 3.5 मिलियन से ज्यादा भारतीय यूएई में रहते हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है। लेकिन यह घटना दिखाती है कि विदेश में फेक न्यूज फैलाने की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है।
यह पहली बार नहीं है जब यूएई ने फेक न्यूज पर सख्ती दिखाई। 2022-23 में भी कई मामलों में गिरफ्तारियां हुई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंग के समय सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। AI टूल्स से फर्जी वीडियो बनाना आसान हो गया है, जो पैनिक फैलाते हैं। यूएई की साइबर क्राइम यूनिट लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
भारतीय समुदाय में चिंता है। कई भारतीयों ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जंग से जुड़ी कोई भी खबर शेयर करने से पहले सोचें, देश की कानून का सम्मान करें।” कुछ ने मांग की कि भारत सरकार विदेश में रहने वाले भारतीयों को फेक न्यूज से दूर रहने की सलाह दे।
यूएई सरकार का यह कदम जंग के समय स्थिरता बनाए रखने का संदेश है। आरोपियों को त्वरित ट्रायल होगा। अगर दोषी पाए गए तो सजा के साथ-साथ सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी के साथ पोस्ट करना कितना जरूरी है, खासकर संवेदनशील मुद्दों पर।भारतीयों की गिरफ्तारी की खबर से भारत-यूएई संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह चेतावनी है कि विदेश में कानून का पालन करना अनिवार्य है। यूएई में रहने वाले लाखों भारतीय अब सतर्क हो गए हैं।