सीकर में आवारा सांडों का आतंक: ANM और मजदूर की दर्दनाक मौत, एक पर पीछे से हमला, दूसरे के सीने को चीर गया सींग

राजस्थान के सीकर जिले में आवारा सांडों के हमले में एक ही दिन में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। झाझड़ गांव में ANM मधु जांगिड़ पर पीछे से सांड ने हमला कर दिया, जबकि रानोली में मजदूर मुकेश वर्मा के सीने में सांड का सींग आर-पार हो गया।

May 31, 2026 - 13:39
सीकर में आवारा सांडों का आतंक: ANM और मजदूर की दर्दनाक मौत, एक पर पीछे से हमला, दूसरे के सीने को चीर गया सींग

राजस्थान के सीकर जिले में शनिवार का दिन दो परिवारों के लिए जिंदगीभर का दर्द छोड़ गया। जिले में आवारा सांडों के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं में एक ANM और एक मजदूर की मौत हो गई। दोनों हादसों ने एक बार फिर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते आवारा पशुओं के खतरे को उजागर कर दिया है।

पहली घटना नेछवा थाना क्षेत्र के झाझड़ गांव में हुई, जहां 28 वर्षीय ANM मधु जांगिड़ सांड के हमले का शिकार हो गईं। मधु गुमानपुरा के उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत थीं और किसी काम से नेछवा आने के बाद अपने पीहर झाझड़ पहुंची थीं। गांव में सांडशाला के पास से गुजरते समय एक सांड ने पीछे से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल मधु को पहले नेछवा अस्पताल और फिर सीकर रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

मधु जांगिड़ की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनका आठ महीने का बेटा है, जबकि उनके पति विदेश में नौकरी करते हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद वे तुरंत भारत लौट आए। परिवार के सामने अब भावनात्मक और सामाजिक दोनों तरह की बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

दूसरी घटना शनिवार शाम रानोली कस्बे में हुई। बाणियों की ढाणी निवासी 35 वर्षीय मुकेश वर्मा मजदूरी कर बाइक से घर लौट रहे थे। स्टेशन रोड स्थित हनुमान कॉलोनी के पास दो सांड आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान एक सांड ने अचानक मुकेश पर हमला कर दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांड का सींग उनके सीने को चीरते हुए आर-पार निकल गया।

गंभीर हालत में मुकेश को पहले रानोली अस्पताल और बाद में सीकर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार मुकेश मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी।

इन दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सांड और अन्य पशु सड़कों पर खुलेआम घूमते हैं, वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं और राहगीरों पर हमला करते हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों को सामान्य दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि स्थानीय निकायों की लापरवाही सामने आती है तो मृतकों के परिजन एफआईआर दर्ज कराने, मुआवजे की मांग करने और राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने जैसे कानूनी कदम उठा सकते हैं।

सीकर में एक ही दिन में हुई इन दो मौतों ने प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए जिम्मेदार एजेंसियां क्या ठोस कदम उठाती हैं या फिर यह मुद्दा भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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