कोटा PWD क्वालिटी कंट्रोल में 15 लाख का फर्जीवाड़ा: ई-ग्रास पोर्टल पर 59 चालान गायब, विभाग में मचा हड़कंप

कोटा PWD के क्वालिटी कंट्रोल खंड में ई-ग्रास पोर्टल पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में 59 चालान फर्जी पाए गए, जिनकी राशि करीब 15 लाख रुपए सरकारी खाते में जमा ही नहीं हुई।

May 31, 2026 - 14:33
कोटा PWD क्वालिटी कंट्रोल में 15 लाख का फर्जीवाड़ा: ई-ग्रास पोर्टल पर 59 चालान गायब, विभाग में मचा हड़कंप

ई-ग्रास पोर्टल पर 59 चालान गायब, 15 लाख रुपए की गड़बड़ी से हड़कंप

राजस्थान के कोटा में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के क्वालिटी कंट्रोल खंड में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। ई-ग्रास पोर्टल की जांच में 59 ऐसे चालान मिले हैं, जो पोर्टल पर रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे। इन चालानों के जरिए करीब 15 लाख रुपए की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हो सकी।

मामले के खुलासे के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और अधिकारी कोटा से लेकर जयपुर मुख्यालय तक दौड़ लगा रहे हैं।

जूनियर अकाउंटेंट की जांच में खुला मामला

यह गड़बड़ी तब सामने आई जब हाल ही में विभाग में जॉइन करने वाले एक जूनियर अकाउंटेंट ने पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू की। उन्होंने GRN नंबर के आधार पर ई-ग्रास पोर्टल पर मिलान किया तो 59 चालान “No Record Found” दिखे।

इसके बाद संबंधित अधिकारियों को लिखित सूचना दी गई और मामले की आंतरिक जांच शुरू की गई।

कैसे काम करता है ई-ग्रास सिस्टम

PWD और अन्य सरकारी विभागों में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए ठेकेदार निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करते हैं। यह भुगतान ई-ग्रास पोर्टल पर चालान के रूप में दर्ज होता है, जिसमें GRN (Government Receipt Number) और भुगतान की पूरी जानकारी होती है।

ठेकेदार इसी चालान की कॉपी लैब में जमा करवाते हैं और वेरिफिकेशन के बाद इसे विभागीय रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है।

लेकिन इस मामले में सामने आया कि कई चालान पोर्टल पर दर्ज ही नहीं थे, जबकि कागजों में उन्हें वैध दिखाया गया था।

सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच हुई गड़बड़ी

जांच में सामने आया है कि यह फर्जी या अपंजीकृत चालान सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच जमा किए गए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन चालानों के जरिए सरकारी खाते में लगभग 15 लाख रुपए नहीं पहुंचे।

यह भी आशंका जताई जा रही है कि बिना वेरिफिकेशन के ही इन्हें विभागीय रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया।

कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, चालान वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी क्वालिटी कंट्रोल लैब के असिस्टेंट टेस्टिंग ऑफिसर (ATO) और कैशियर की होती है। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है, लेकिन पिछले दो वर्षों में इस गड़बड़ी का पता नहीं चल सका।

आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में ठेकेदारों से नकद या ऑनलाइन माध्यम से अतिरिक्त राशि लेकर चालान जारी किए जाते थे, लेकिन वह राशि सरकारी खाते में जमा नहीं होती थी।

अधिकारी दे रहे तकनीकी एरर का हवाला

क्वालिटी कंट्रोल के XEN आर.के. मीणा ने शुरुआती बयान में इसे “तकनीकी एरर” बताया है और कहा है कि रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया जारी है। वहीं विभागीय स्तर पर रिकवरी की बात भी कही जा रही है।

दूसरी ओर ATO ने दावा किया है कि चालान वेरिफाई करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है और यह कार्य अकाउंट सेक्शन का है। इस बयान से विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर और भ्रम की स्थिति बन गई है।

जयपुर तक पहुंचा मामला, जांच जारी

मामला सामने आने के बाद अब विभाग के अधिकारी जयपुर मुख्यालय तक पहुंचकर ई-ग्रास और वित्त विभाग से जांच करवा रहे हैं। ट्रेजरी स्तर पर भी कुछ चालानों की जांच की गई, जिसमें भी पोर्टल पर रिकॉर्ड नहीं मिला।

फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। कोटा PWD का यह मामला केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि सिस्टम की निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह विभागीय स्तर पर बड़ी लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का मामला बन सकता है।

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