सचिवालय की महिला अधिकारी बनीं मिसेज राजस्थान की उपविजेता... बोलीं- परिवार का साथ हो तो हर सपना होता है पूरा
मिसेज राजस्थान-2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाली टॉप मॉडल्स ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। सरकारी नौकरी, परिवार, बच्चों की जिम्मेदारी, स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद इन महिलाओं ने साबित कर दिया कि अगर हौसला और परिवार का साथ हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित ब्यूटी और पर्सनैलिटी पेजेंट्स में शामिल मिसेज राजस्थान-2026 सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, संघर्ष और सपनों का उत्सव बनकर सामने आया। 24 मई को आयोजित हुए इस ग्रैंड फिनाले में 1700 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिनमें से गोल्ड और सिल्वर कैटेगरी की चुनिंदा प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
इस मंच पर पहुंचीं महिलाओं ने साबित कर दिया कि शादी, परिवार, बच्चों की जिम्मेदारी और उम्र जैसी परिस्थितियां किसी भी महिला के सपनों की राह नहीं रोक सकतीं। प्रतियोगिता में विजेता और रनरअप रहीं प्रतिभागियों ने अपने संघर्ष, परिवार के सहयोग और सफलता के सफर को साझा करते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने का संदेश दिया।
सरकारी नौकरी के साथ मॉडलिंग, सावी शर्मा बनीं प्रेरणा
जयपुर सचिवालय में राजस्थान सब-ऑर्डिनेट अकाउंट सर्विसेज के तहत असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर (AAO) के पद पर कार्यरत सावी शर्मा ने मिसेज राजस्थान-2026 की सिल्वर कैटेगरी में थर्ड रनर-अप का खिताब अपने नाम किया।
सावी शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान सबसे बड़ी चुनौती उनके डेढ़ साल के बेटे की देखभाल थी। ट्रेनिंग से लेकर फिनाले तक परिवार ने उनकी पूरी मदद की। पति और ससुराल पक्ष के सहयोग की वजह से ही वह अपने सपनों को पूरा कर सकीं।
उन्होंने कहा कि यदि परिवार साथ खड़ा हो तो महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। फिनाले के दिन उनका बेटा भी कार्यक्रम में मौजूद था, जिसने इस उपलब्धि को और खास बना दिया।
हेल्थ प्रॉब्लम के बावजूद अदिति ने जीता मंच
गोल्ड कैटेगरी में सेकंड रनर-अप रहीं अदिति चौधरी ने बताया कि उनका सफर आसान नहीं था। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने आत्मविश्वास के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
अदिति का मानना है कि महिलाएं यदि दृढ़ संकल्प रखें तो स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपनी उम्र और वैवाहिक स्थिति को कभी अपनी सफलता के रास्ते में बाधा न बनने दें।
पैशन के लिए समय निकालना जरूरी: पारुल शर्मा
गोल्ड कैटेगरी में थर्ड रनर-अप रहीं पारुल शर्मा का कहना है कि विवाहित महिलाओं के लिए परिवार पहली प्राथमिकता होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अपने सपनों को छोड़ दें।
गाजियाबाद से जयपुर आईं पारुल वर्तमान में फूड इन्फ्लुएंसर के रूप में भी काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला का लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे खुद पर विश्वास हो तो वह हर परिस्थिति में अपने सपनों को साकार कर सकती है।
परिवार और करियर दोनों संभाल सकती हैं महिलाएं: भावना मीना
गोल्ड कैटेगरी में फोर्थ रनर-अप रहीं भावना मीना ने बताया कि उनका परिवार आर्मी बैकग्राउंड से है और उनके पति मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं। ऐसे में घर और नौकरी की जिम्मेदारी अधिकतर उन्हें ही संभालनी पड़ती है।
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से जुड़ी भावना का कहना है कि महिलाओं में मल्टीटास्किंग की अद्भुत क्षमता होती है। यदि आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति हो तो महिलाएं परिवार, करियर और अपने सपनों के बीच बेहतरीन संतुलन बना सकती हैं।
पुराने सपनों को फिर से जीने का मौका मिला: ख्याति पारीक
सिल्वर कैटेगरी में सेकंड रनर-अप रहीं ख्याति पारीक पेशे से एचआर प्रोफेशनल हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से उनका सपना फैशन इंडस्ट्री से जुड़ने का था, लेकिन पढ़ाई और नौकरी की व्यस्तताओं के कारण वह सपना अधूरा रह गया।
मिसेज राजस्थान के मंच ने उन्हें अपने पुराने सपनों को दोबारा जीने का अवसर दिया। अब वह महिला और बाल शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करना चाहती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में योगदान देना चाहती हैं।
गांव की महिलाओं की सोच बदलना चाहती हैं मीनाक्षी
झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र की रहने वाली मीनाक्षी ने सिल्वर कैटेगरी में फोर्थ रनर-अप का स्थान हासिल किया।
मीनाक्षी का कहना है कि छोटे गांवों की महिलाओं और लड़कियों को ग्लैमर इंडस्ट्री और व्यक्तित्व विकास के अवसरों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। वह इस मंच के जरिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रेरित करना चाहती हैं ताकि वे भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा सकें।
उनका मानना है कि यदि एक महिला भी प्रेरित होती है तो वह आने वाली पूरी पीढ़ी की सोच बदल सकती है।
मंच से मिला महिलाओं को आत्मविश्वास का संदेश
मिसेज राजस्थान-2026 की प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि महिलाओं को अपनी पहचान केवल परिवार या सामाजिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखनी चाहिए। हर महिला के अंदर कोई न कोई प्रतिभा और सपना होता है, जिसे पूरा करने का अधिकार उसे मिलना चाहिए।
प्रतियोगिता में शामिल महिलाओं ने साबित किया कि उम्र, वैवाहिक जीवन, बच्चों की जिम्मेदारी या सामाजिक दबाव किसी भी महिला की सफलता के रास्ते की अंतिम बाधा नहीं हैं। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
मिसेज राजस्थान-2026 का मंच इसी संदेश के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और अपने सपनों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता नजर आया।