राजस्थान के 60 हजार शिक्षकों पर टेट का संकट: 2028 तक परीक्षा पास नहीं की तो जा सकती है नौकरी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान के करीब 60 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला चिंता का विषय बन गया है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अब वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) उत्तीर्ण करना होगा। यह निर्णय प्रदेश के लगभग 60 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा में बने रहने और भविष्य में पदोन्नति का लाभ लेने के लिए शिक्षकों को टेट परीक्षा पास करनी होगी। इसके लिए पहले दो वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राहत देते हुए एक वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया है।
अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर असर
गौरतलब है कि वर्ष 2010 से पहले शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में टेट परीक्षा का प्रावधान नहीं था। उस समय नियमों के अनुसार नियुक्तियां की गई थीं और शिक्षकों ने वर्षों तक सेवाएं भी दी हैं।
लेकिन शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने और राष्ट्रीय स्तर पर टेट व्यवस्था शुरू होने के बाद पात्रता मानकों में बदलाव आया। अब वही बदलाव पुराने शिक्षकों पर भी लागू होने जा रहा है।
तीन दशक की सेवा के बाद भी देनी पड़ सकती है परीक्षा
इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव उन शिक्षकों पर पड़ेगा जो 30 से 34 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। कई ऐसे शिक्षक हैं जो अपने करियर के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं, लेकिन सेवा में बने रहने के लिए अब उन्हें पात्रता परीक्षा देनी पड़ सकती है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना वरिष्ठ शिक्षकों के लिए आसान नहीं होगा।
किसे मिलेगी छूट?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें टेट परीक्षा से छूट दी जाएगी।
इसका अर्थ है कि केवल वही शिक्षक परीक्षा देने के दायरे में आएंगे जिनकी सेवा अवधि में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है।
कितने शिक्षक होंगे प्रभावित?
राजस्थान में वर्तमान में लगभग 2.40 लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 2012 के बाद हुई विभिन्न भर्तियों में नियुक्त अधिकांश शिक्षक पहले से ही रीट और टेट पात्रता व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं।
हालांकि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त करीब 60 हजार शिक्षक ऐसे हैं जिनके सामने अब टेट पास करने की अनिवार्यता खड़ी हो गई है। यही वर्ग इस फैसले से सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांगा समाधान
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत हुई थीं।
संगठनों का तर्क है कि तीन दशक तक सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों को अब नई पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा करेगा। इसलिए सरकार को उनके हित में कोई वैकल्पिक समाधान निकालना चाहिए।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर टिकी हैं। यदि कोई विधायी या प्रशासनिक समाधान नहीं निकलता है, तो हजारों शिक्षकों को 2028 तक टेट परीक्षा पास करने के लिए तैयारी करनी होगी।
यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन साथ ही लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती भी बन गया है।