राजस्थान में मानसून को लेकर बढ़ी उत्सुकता, क्या शुरू हो गई मानसून की बारिश? जानिए कब पहुंचेगा मानसून और कितना बरसेगा पानी

राजस्थान में आंधी और बारिश से मौसम सुहाना हो गया है, लेकिन क्या यह मानसून की दस्तक है? आखिर प्रदेश में मानसून कब पहुंचेगा, अल नीनो का क्या असर रहेगा और किसानों के लिए इस बार बारिश कैसी रहने वाली है? जानिए मौसम विभाग के ताजा अनुमान और हर सवाल का जवाब।

Jun 5, 2026 - 13:10
राजस्थान में मानसून को लेकर बढ़ी उत्सुकता, क्या शुरू हो गई मानसून की बारिश? जानिए कब पहुंचेगा मानसून और कितना बरसेगा पानी
राजस्थान मौसम अपडेट

जयपुर। राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से मौसम ने अचानक करवट ली है। भीषण गर्मी और लू से झुलस रहे प्रदेश में अब काले बादल, तेज आंधियां और बारिश लोगों को राहत दे रही हैं। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर सहित कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। हालांकि इस बदले मौसम के बीच लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्थान में मानसून की एंट्री हो चुकी है या अभी इसका इंतजार बाकी है?

किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे हैं, वहीं आमजन भी मानसून की वास्तविक स्थिति जानना चाहते हैं। ऐसे में मौसम विभाग की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के अनुमानों के आधार पर समझते हैं कि राजस्थान में मानसून की क्या स्थिति है और आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहने वाला है।

क्या राजस्थान में मानसून पहुंच चुका है?

फिलहाल राजस्थान में जो बारिश और आंधी देखने को मिल रही है, वह दक्षिण-पश्चिम मानसून की नहीं बल्कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और प्री-मानसून गतिविधियों का परिणाम है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अभी मानसून का प्रवेश नहीं हुआ है।

इन मौसमी सिस्टमों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं, गरज-चमक और बारिश हो रही है। हालांकि इससे लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन कई स्थानों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। तेज अंधड़ और आकाशीय घटनाओं के चलते विभिन्न जिलों में जान-माल का नुकसान भी सामने आया है।

राजस्थान में मानसून कब देगा दस्तक?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है। सामान्यतः मानसून को केरल से राजस्थान तक पहुंचने में लगभग 25 से 30 दिन का समय लगता है।

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मानसून की प्रगति सामान्य रही तो जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच राजस्थान में मानसून प्रवेश कर सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वी राजस्थान में मानसून पहले पहुंचेगा, जबकि पश्चिमी राजस्थान में इसकी सक्रियता कुछ दिन बाद दिखाई दे सकती है।

क्या इस बार अल नीनो बिगाड़ेगा मानसून का गणित?

इस वर्ष मौसम वैज्ञानिकों की नजर अल नीनो (El Nino) पर टिकी हुई है। अल नीनो एक वैश्विक जलवायु प्रणाली है, जिसका प्रभाव भारतीय मानसून पर भी पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो सक्रिय रहने की स्थिति में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना बन सकती है।

हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि मानसून के अंतिम स्वरूप का आकलन अभी जल्दबाजी होगा, क्योंकि आगामी सप्ताहों में समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव संभव है।

कम बारिश होने पर किसानों पर क्या होगा असर?

राजस्थान की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है। ऐसे में कम बारिश की आशंका किसानों की चिंता बढ़ा रही है। हालांकि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।

राज्य के कई प्रमुख बांधों और जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर जल भंडारण उपलब्ध है। पश्चिमी राजस्थान के बांधों में लगभग 44 प्रतिशत और उत्तरी क्षेत्रों के जलाशयों में करीब 34 प्रतिशत पानी मौजूद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती बुवाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यदि मानसून कमजोर रहा तो बाद के चरणों में नमी की कमी, कीट प्रकोप और उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

अगले कुछ दिनों तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार 4 जून से 7 जून तक राजस्थान के कई जिलों में मौसम सक्रिय बना रहेगा।

जिन संभागों में बारिश की संभावना

  • जयपुर
  • अजमेर
  • कोटा
  • भरतपुर
  • उदयपुर

इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

पश्चिमी राजस्थान में स्थिति

  • जोधपुर
  • बीकानेर

इन संभागों में 6 जून तक हल्की बारिश की संभावना है, जबकि 7 जून के बाद मौसम शुष्क होने लगेगा।

8 से 10 जून तक

मौसम विभाग के अनुसार 8 जून के बाद अधिकांश जिलों में मौसम साफ रहने और गर्मी बढ़ने की संभावना है।

मानसून से पहले राहत और चिंता दोनों

फिलहाल राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियों ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, लेकिन किसानों, जल संसाधन विशेषज्ञों और प्रशासन की नजर अब मानसून की वास्तविक प्रगति पर टिकी हुई है। आने वाले दो से तीन सप्ताह प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, क्योंकि इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि इस बार मानसून राजस्थान को कितनी राहत और कितना पानी देने वाला है।

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