RBI के बड़े फैसले से रुपये को मिली ताकत: डॉलर के मुकाबले 50 पैसे उछला रुपया, विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश नियमों में ढील दिए जाने के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 पर पहुंच गया।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया नीतिगत फैसलों का असर शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में साफ दिखाई दिया। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और 50 पैसे की छलांग लगाते हुए 95.24 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई द्वारा विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा। इसका सीधा असर विदेशी पूंजी प्रवाह और रुपये की मजबूती के रूप में देखने को मिल सकता है।
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए RBI के बड़े कदम
रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश की सीमा भी बढ़ाई गई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इन फैसलों से भारत में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता आएगी। आरबीआई ने 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के दायरे का विस्तार किया है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश और आसान हो जाएगा। साथ ही विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी सुविधाओं के माध्यम से भी बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर RBI का भरोसा
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का लगभग 682 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट या बाहरी झटके का सामना करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है और केंद्रीय बैंक किसी भी संभावित जोखिम से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे विदेशी निवेशकों का विश्वास भी बढ़ता है और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनी रहती है।
रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ बनाए रखा है।
आरबीआई का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में आर्थिक जरूरतों के अनुसार नीति में बदलाव की गुंजाइश रखी गई है। रेपो रेट स्थिर रहने से होम लोन, वाहन लोन और अन्य बैंकिंग उत्पादों की ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
विकास दर का अनुमान घटाया, महंगाई का बढ़ाया
वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में संशोधन किया है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर (GDP Growth) का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बनी चुनौती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हालांकि आरबीआई के हालिया सुधारों और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदमों ने फिलहाल बाजार की चिंताओं को काफी हद तक कम किया है।
रुपये की मजबूती का आम लोगों पर क्या असर?
रुपये के मजबूत होने से भारत का आयात खर्च कम हो सकता है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही विदेशी निवेश बढ़ने से शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर आगे भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, आरबीआई के हालिया फैसलों ने भारतीय वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बनाया है। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल रुपये के लिए बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं।