मिट्टी को बंजर होने से बचाने की तैयारी, खेत बचाओ अभियान को लेकर किरोड़ी मीणा की बैठक
राजस्थान में खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने किसानों से अपने खेत के 25 प्रतिशत हिस्से में जैविक खेती अपनाने की अपील की है।
जयपुर में देशभर में चल रहे “खेत बचाओ अभियान” के तहत राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने किसानों और जनप्रतिनिधियों से बड़ा आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि सभी किसान अपने खेत के कम से कम 25 प्रतिशत हिस्से में जैविक खेती अपनाएं, ताकि भूमि की गुणवत्ता और उर्वरक क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
मिट्टी बचाने पर जोर
कृषि मंत्री ने चेतावनी दी कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से आने वाले वर्षों में जमीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कई क्षेत्रों की भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि खेत को बचाने के लिए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Health Test) और संतुलित पोषक प्रबंधन बेहद जरूरी है।
वीसी के जरिए अधिकारियों से संवाद
डॉ. मीणा ने पंत कृषि भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के कृषि अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को रासायनिक खाद के सीमित उपयोग, हरी खाद, जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के लिए जागरूक किया जाए।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती और जैविक खेती ही खेतों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने किसानों को बताया कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) तकनीक अपनाकर उत्पादन और मिट्टी दोनों को संतुलित रखा जा सकता है।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य
खेत बचाओ अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग
- रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना
- जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना
- जैव उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग बढ़ाना
- ढेचा और ग्वार जैसी फसलों से मिट्टी सुधार
- किसानों को हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित करना
- एनपीके और एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों को प्रोत्साहन देना
जनप्रतिनिधियों से भी अपील
कृषि मंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे स्वयं अपने खेतों के 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाकर उदाहरण पेश करें।
राज्य में अभियान को गति देने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान इस अभियान में देशभर में अग्रणी भूमिका निभाए। इसके लिए श्रीगंगानगर, अलवर, बारां, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, हनुमानगढ़, जोधपुर, कोटा और नागौर जैसे जिलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।