राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: लाखों यात्री परेशान, जयपुर में मारपीट की घटना, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, 35 हजार बसें बंद होने से लाखों यात्री फंसे। जयपुर में बस रोकने को लेकर मारपीट, यात्रियों को जबरन उतारा। परिवहन आयुक्त ने पुलिस से बसों, ड्राइवरों व यात्रियों की सुरक्षा की मांग की। ऑपरेटर्स आरटीओ की मनमानी चालान, RC सस्पेंड और स्लीपर बसों पर कार्रवाई के विरोध में हड़ताल पर, वार्ता बेनतीजा। 20 करोड़ के एडवांस टिकट रिफंड किए गए।

Feb 25, 2026 - 11:38
राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: लाखों यात्री परेशान, जयपुर में मारपीट की घटना, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल बुधवार (25 फरवरी 2026) को दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे प्रदेशभर में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। परिवहन विभाग और बस ऑपरेटर्स के बीच कई दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के कारण करीब 35,000 से अधिक स्लीपर, स्टेज कैरिज (लोक परिवहन) और अन्य निजी बसें बंद पड़ी हैं। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर जयपुर, कोटा, उदयपुर, सीकर, जोधपुर और अन्य प्रमुख शहरों में देखा जा रहा है, जहां लाखों यात्री फंस गए हैं।

हड़ताल की वजह और ऑपरेटर्स की मांगें

निजी बस ऑपरेटर्स परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई से नाराज हैं। वे आरोप लगाते हैं कि विभाग मनमाने ढंग से भारी-भरकम चालान काट रहा है, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) सस्पेंड कर रहा है और स्लीपर बसों पर लगातार जुर्माने लगा रहा है। ऑपरेटर्स का कहना है कि इससे उनका कारोबार चौपट हो रहा है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:

RC निलंबन तत्काल वापस लिया जाए।

जिला स्तर पर निरस्तीकरण रोका जाए।

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत कार्रवाई बंद हो।

एआईपीपी परमिट टैक्स को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर स्लैब में कम किया जाए।ओवरहेंग, लगेज कैरियर आदि पर कार्रवाई न हो।

हड़ताल 23 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि (रात 12 बजे) से शुरू हुई थी और यह अनिश्चितकालीन है। ऑपरेटर्स ने साफ कहा है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, कोई भी बस सड़क पर नहीं उतरेगी। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि 28 फरवरी को अजमेर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री की रैली के लिए भी बसें उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।

जयपुर में हिंसक झड़प और यात्रियों की जबरन उतरवाई

बुधवार सुबह जयपुर में हड़ताल के दौरान तनाव चरम पर पहुंच गया। हड़ताली ऑपरेटर्स ने कुछ चल रही प्राइवेट बसों को रोकने की कोशिश की, जिससे आपस में मारपीट हो गई। कुछ मामलों में यात्रियों को बसों से जबरन उतारा गया। यह घटना जयपुर के प्रमुख बस स्टैंड्स और रूट्स पर देखी गई, जहां हड़ताली ऑपरेटर्स ने "हम बसें नहीं चलने देंगे" का नारा लगाया।

परिवहन विभाग का पक्ष और सुरक्षा की मांग

परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने स्पष्ट किया है कि लोक परिवहन (स्टेज कैरिज) बस ऑपरेटर्स हड़ताल में शामिल नहीं हैं और वे नियमित रूप से बसें चलाना चाहते हैं। विभाग का दावा है कि कार्रवाई सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर की जा रही है।परिवहन कमिश्नर ने जयपुर पुलिस कमिश्नर, जयपुर ग्रामीण और सीकर के पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर लोक परिवहन बसों, ड्राइवरों, कंडक्टरों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। खासकर जयपुर-सीकर रूट पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी बस को जबरन रोका गया तो पुलिस कार्रवाई करेगी।

यात्रियों पर असर और आर्थिक नुकसान

हड़ताल से रोजाना करीब 15 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हो रहे हैं। कई बस स्टैंड्स जैसे जयपुर का सिंधी कैंप, हीरापुरा, चौमूं सर्किल और ट्रांसपोर्ट नगर में भीड़ उमड़ रही है। सरकारी रोडवेज बसों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे टिकट मिलना मुश्किल हो गया है।निजी बस ऑपरेटर्स ने दावा किया है कि मंगलवार को बसें न चलने से एडवांस टिकट के करीब 20 करोड़ रुपये यात्रियों को वापस कर दिए गए हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी 28 फरवरी तक बंद कर दी गई है।

स्थिति और आगे क्या?

वार्ता के बावजूद गतिरोध बढ़ता जा रहा है। ऑपरेटर्स ने अब नई शर्त रख दी है कि आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र चौधरी और इंस्पेक्टर राजेश चौधरी को एपीओ (अनुशासनात्मक कार्रवाई) किया जाए, तभी आगे बातचीत होगी। इससे तीसरे दौर की वार्ता भी अनिश्चित हो गई है।यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वैकल्पिक साधनों जैसे ट्रेन, निजी टैक्सी या अन्य राज्यों की बसों का सहारा लें, लेकिन जयपुर जैसे शहरों में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है। हड़ताल के कारण खाटू श्यामजी मेले जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए आने वाले श्रद्धालु भी फंस गए हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.