राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे? हाईकोर्ट की 31 जुलाई डेडलाइन नजदीक फिर भी आरक्षण प्रक्रिया बनी देरी की वजह

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा में देरी हो रही है।

Jun 5, 2026 - 11:46
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे? हाईकोर्ट की 31 जुलाई डेडलाइन नजदीक फिर भी आरक्षण प्रक्रिया बनी देरी की वजह

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर चुनावी तैयारियां अभी तक पूरी गति नहीं पकड़ सकी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायत राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और राज्य ओबीसी आयोग के बीच लगातार पत्राचार तो हो रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनाव प्रक्रिया अभी भी अधूरी नजर आ रही है। यही कारण है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सबसे बड़ी बाधा आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को माना जा रहा है। जब तक अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीटों का अंतिम निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने दिए थे 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया पूरी करते हुए 31 जुलाई तक चुनाव संपन्न कराए जाएं। लेकिन अब इस समयसीमा में बहुत कम समय शेष बचा है और प्रशासनिक तैयारियों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए चुनाव कार्यक्रम को लेकर संशय बना हुआ है।

राजनीतिक दल भी चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं, लेकिन आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं होने से संभावित उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

आरक्षण तय होने के बाद ही जारी होगा चुनाव कार्यक्रम

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र भेजकर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण की अंतिम सूची मिलने के बाद ही निर्वाचन क्षेत्रों का अंतिम स्वरूप तय किया जा सकेगा और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव होगी।

निर्वाचन आयोग का मानना है कि बिना आरक्षण निर्धारण के चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक सीट का आरक्षित या सामान्य वर्ग में वर्गीकरण इसी आधार पर तय होगा।

ओबीसी आरक्षण बना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा

सूत्रों के अनुसार वर्तमान में सबसे ज्यादा ध्यान ओबीसी आरक्षण के निर्धारण पर केंद्रित है। राज्य सरकार के दोनों विभागों ने राज्य ओबीसी आयोग से संपर्क बढ़ा दिया है और आवश्यक आंकड़े जुटाने का कार्य तेज कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार पहले ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत और सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद ही एससी, एसटी और महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीटों का अंतिम बंटवारा किया जा सकेगा। यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया एक-दूसरे पर निर्भर है और किसी भी स्तर पर देरी होने से चुनाव कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहा है।

400 से अधिक पंचायतों के आंकड़े नहीं मिलने से अटका मामला

राज्य ओबीसी आयोग के अधिकारियों के अनुसार आयोग को अधिकांश आवश्यक आंकड़े प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन अभी भी कई पंचायतों की जनसंख्या से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।

सूत्रों के मुताबिक करीब 400 से अधिक पंचायतों के आंकड़े अभी तक पंचायत राज विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके अलावा कई जिलों से प्राप्त डेटा में तकनीकी त्रुटियां और असंगतियां भी सामने आई हैं, जिनके सुधार के लिए विभागों के बीच पुनः पत्राचार किया जा रहा है।

इन कमियों के कारण आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं कर पा रहा है, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

तकनीकी और प्रशासनिक समन्वय बना चुनौती

चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों और आयोगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। अधिकारियों का मानना है कि आरक्षण निर्धारण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी और संवैधानिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ विषय है।

यही कारण है कि हर आंकड़े और दस्तावेज की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।

क्या समय पर हो पाएंगे चुनाव?

हाईकोर्ट की ओर से तय 31 जुलाई की समय सीमा को देखते हुए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और संबंधित विभाग समय रहते आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे या नहीं। यदि आने वाले दिनों में आंकड़ों का सत्यापन और आरक्षण निर्धारण जल्द पूरा नहीं हुआ तो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदान प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।