बाड़मेर के 30 गांव चौथे दिन भी अंधेरे में, आंधी-तूफान से 4621 बिजली पोल और 112 ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त

बाड़मेर में 1 और 2 जून को आए भीषण आंधी-तूफान ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जिले के 205 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी, जिनमें से 175 गांवों में सप्लाई बहाल कर दी गई है।

Jun 5, 2026 - 12:58
बाड़मेर के 30 गांव चौथे दिन भी अंधेरे में, आंधी-तूफान से 4621 बिजली पोल और 112 ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में 1 और 2 जून को आए भीषण आंधी-तूफान ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। तेज हवाओं और धूलभरी आंधी के कारण जिलेभर में हजारों बिजली पोल धराशायी हो गए और बड़ी संख्या में ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गए। हालात इतने गंभीर हो गए कि 205 गांवों और सैकड़ों ढाणियों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।

तूफान के चार दिन बाद भी जिले के 30 गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं, जबकि 175 गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। बिजली निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में युद्धस्तर पर राहत और मरम्मत कार्य जारी है।

4621 पोल और 112 ट्रांसफॉर्मर हुए क्षतिग्रस्त

जोधपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार मीना के अनुसार आंधी-तूफान के कारण जिले में 4621 बिजली पोल और 112 ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा कई 33 केवी बिजली लाइनों के पोल टूट गए, जिससे दर्जनों 33/11 केवी ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) बंद हो गए और व्यापक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो गई।

तूफान का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां कई गांवों में बिजली के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

41 टीमें दिन-रात कर रही हैं काम

बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए डिस्कॉम ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 41 विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें सैकड़ों कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।

टीमें टूटे हुए पोल बदलने, बिजली लाइनों की मरम्मत करने और फॉल्ट को दूर करने में जुटी हुई हैं। अब तक 4621 में से करीब 510 क्षतिग्रस्त पोल बदले जा चुके हैं, जबकि कई इलाकों में नई लाइनें बिछाने का काम भी जारी है।

175 गांवों में लौटी रोशनी

अधीक्षण अभियंता के मुताबिक गुरुवार शाम तक 205 प्रभावित गांवों में से 175 गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। कई क्षेत्रों में तार टूटने और पोल गिरने के कारण मरम्मत कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है।

हालांकि डिस्कॉम का दावा है कि शेष 30 गांवों में भी जल्द बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी और इसके लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए गए हैं।

जिला कलेक्टर ने किया निरीक्षण

बिजली संकट को देखते हुए जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल स्वयं लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मरम्मत कार्यों का जायजा लिया।

कलेक्टर ने बेरीवाला तला गांव पहुंचकर बिजली बहाली कार्य का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों को जल्द राहत पहुंचाने के लिए कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए।

मुख्यालय स्तर से हो रही मॉनिटरिंग

बिजली बहाली कार्य की निगरानी केवल जिला स्तर पर ही नहीं बल्कि निगम मुख्यालय स्तर पर भी की जा रही है। जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक और मुख्य अभियंता लगातार प्रगति रिपोर्ट ले रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

प्रशासन और डिस्कॉम के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

आरडीएसएस योजना के पोल बने सहारा

बिजली बहाली में तेजी लाने के लिए डिस्कॉम ने विशेष निर्णय लेते हुए आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत उपलब्ध बिजली पोलों को अस्थायी रूप से उपयोग में लेने की अनुमति दी है।

प्रबंध निदेशक डॉ. बी.एल. डेलू के निर्देश पर इन पोलों को लोन बेस पर उपलब्ध कराया गया है ताकि नए पोलों की आपूर्ति आने तक मरम्मत कार्य बाधित न हो और ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द से जल्द बिजली बहाल की जा सके।

ग्रामीणों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद

चार दिनों से बिजली संकट झेल रहे ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में शेष गांवों में भी बिजली आपूर्ति बहाल हो जाएगी। प्रशासन और डिस्कॉम का दावा है कि लगातार चल रहे मरम्मत कार्यों के कारण जल्द ही जिले की पूरी बिजली व्यवस्था सामान्य हो जाएगी।

भीषण तूफान के बाद शुरू हुआ यह बिजली बहाली अभियान बाड़मेर के इतिहास के सबसे बड़े मरम्मत अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसमें हजारों क्षतिग्रस्त संरचनाओं को फिर से खड़ा करने की चुनौती सामने है।

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