तमिलनाडु में BJP छोड़ते ही अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाई, अगला चुनाव लड़ने का ऐलान; बोले- आलाकमान से थे मतभेद
तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने 2031 विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए भाजपा नेतृत्व से मतभेद और संगठनात्मक चुनौतियों को इसकी वजह बताया है।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में नया विकल्प तैयार करना है।
अन्नामलाई ने साफ किया कि उनकी नई पार्टी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2031 में मैदान में उतरेगी। उनके इस ऐलान ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
भाजपा से दूरी और इस्तीफे की पृष्ठभूमि
अन्नामलाई ने बताया कि उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को ही भाजपा नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी। बाद में 2 जून को उन्होंने आधिकारिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि पिछले करीब 18 महीनों से पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके विचारों में मतभेद बढ़ते जा रहे थे। उनके अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति को लेकर रणनीति और दृष्टिकोण में असहमति के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
अन्नामलाई का राजनीतिक सफर
के. अन्नामलाई का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर काफी चर्चित रहा है। वे कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और 2019 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा।
- 2020 में भाजपा में शामिल हुए
- तमिलनाडु BJP के उपाध्यक्ष और बाद में प्रदेश अध्यक्ष बने
- 2021 और 2024 चुनावों में पार्टी का चेहरा रहे
- कोयंबटूर और अरवाकुरिची सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार मिली
- संगठन विस्तार और “एन मन्न, एन मक्कल” यात्रा से चर्चा में रहे
भाजपा नेतृत्व से मतभेद
अन्नामलाई ने कहा कि पिछले 18 महीनों में शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मतभेद बढ़ते गए। उनके अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर विचार मेल नहीं खाते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि वे शुरू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर भाजपा में आए थे, लेकिन समय के साथ पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और रणनीति को लेकर असहमति बढ़ती गई।
भाजपा पर संभावित असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई के इस कदम से तमिलनाडु में भाजपा को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
- युवाओं और शहरी मतदाताओं में पकड़ कमजोर होना
- राज्य में पार्टी का मजबूत चेहरा कमजोर पड़ना
- DMK विरोधी वोट बैंक में संभावित असर
हालांकि यह भी माना जा रहा है कि भाजपा का वोट बैंक पूरी तरह किसी एक नेता पर निर्भर नहीं है और NDA गठबंधन इसकी भरपाई कर सकता है।
तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक तस्वीर
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक समीकरण पहले ही बदल चुके हैं। TVK और DMK के उभार के बीच भाजपा का प्रदर्शन सीमित रहा। ऐसे में अन्नामलाई का अलग राजनीतिक रास्ता अपनाना राज्य की राजनीति में नए विकल्प और प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है।
के. अन्नामलाई का नई पार्टी बनाने का फैसला तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या उनका “आंदोलन” राज्य में कोई मजबूत राजनीतिक विकल्प बन पाता है या नहीं।