राजस्थान में पंचायती राज चुनावों से पहले बड़ा खतरा: हजारों पूर्व प्रत्याशियों पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 से पहले बड़ा झटका: 2020 के चुनाव में खर्च का ब्योरा समय पर न जमा करने वाले हजारों पूर्व प्रत्याशियों (पंच, सरपंच, सदस्य आदि) पर राज्य चुनाव आयोग 3 साल तक किसी भी पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा सकता है। आयोग नियमों के तहत 15 दिनों में खर्च विवरण अनिवार्य मानता है, और अब जिला कलेक्टरों से ऐसी लिस्ट मंगाई जा रही है। साथ ही खर्च सीमा दोगुनी की गई है, प्रचार में तांगा-बैलगाड़ी जैसी गाड़ियों पर बैन लगाया गया है, और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने हैं।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
January 17, 2026 • 12:24 PM  449
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राजस्थान में पंचायती राज चुनावों से पहले बड़ा खतरा: हजारों पूर्व प्रत्याशियों पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है
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राजस्थान में पंचायती राज चुनावों से पहले बड़ा खतरा: हजारों पूर्व प्रत्याशियों पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है

राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 में होने की संभावना है। लेकिन इससे पहले राज्य चुनाव आयोग ने सख्ती बरतते हुए पिछले चुनावों में खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले हजारों प्रत्याशियों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। ऐसे प्रत्याशियों को 3 साल तक किसी भी पंचायती राज चुनाव में भाग लेने से रोका जा सकता है।

मुख्य कारण: चुनावी खर्च का ब्योरा न जमा करना

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, हर प्रत्याशी (चाहे वह सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य का पद हो) को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपने कुल चुनावी खर्च का विस्तृत विवरण जिला निर्वाचन अधिकारी या आयोग को जमा करना अनिवार्य है। इसमें प्रचार सामग्री, यात्रा, सभाएं, डिजिटल माध्यमों पर खर्च आदि की पूरी जानकारी और बिल/वाउचर शामिल होते हैं।

2020 के पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने यह ब्योरा समय पर जमा नहीं किया था। आयोग के सूत्रों के अनुसार, ऐसे प्रत्याशियों की संख्या 4-5 हजार या उससे अधिक हो सकती है। अब आयोग इनकी सूची तैयार करवा रहा है। जल्द ही जिला कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे कि वे ऐसे प्रत्याशियों की लिस्ट बनाकर आयोग को भेजें। आयोग अंतिम फैसला लेगा और नियमों के तहत 3 साल की रोक लगा सकता है।

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट कहा है कि यह प्रावधान नियमों में पहले से मौजूद है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरती जाएगी। आयोग जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगा।

पिछले चुनावों का आंकड़ा

2020 में 21 जिलों में जिला परिषद सदस्यों के लिए 636 सीटें और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 4371 सीटें थीं।पंचायत समिति सदस्य पद पर 12,663 और जिला परिषद सदस्य पद पर 1,778 प्रत्याशी लड़े थे।ग्राम पंचायत स्तर पर भी हजारों प्रत्याशी थे, जिनमें से कई ने खर्च विवरण नहीं दिया।

खर्च सीमा दोगुनी क्यों की गई?

राज्य चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर चुनावी खर्च की सीमा दोगुनी कर दी है। नई सीमाएं इस प्रकार हैं:सरपंच पद: 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपयेपंचायत समिति सदस्य: 75 हजार से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपयेजिला परिषद सदस्य: 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपयेकारण: ग्रामीण क्षेत्रों में अब प्रचार के तरीके बदल गए हैं। डिजिटल माध्यम (सोशल मीडिया), यात्रा, सभाएं और अन्य साधनों पर खर्च बढ़ गया है। पुरानी सीमा वास्तविकता से मेल नहीं खा रही थी। आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि इससे उम्मीदवार वैध तरीके से प्रचार कर सकेंगे और पारदर्शिता बनी रहेगी। जनप्रतिनिधि लंबे समय से सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।

प्रचार में सख्त पाबंदियां: तांगा, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी पर रोक

आयोग ने प्रचार वाहनों पर भी कड़े नियम बनाए हैं:बड़े वाहन जैसे बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर का उपयोग प्रतिबंधित।पशु-चालित गाड़ियां जैसे तांगा, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी पूरी तरह बैन।इनका उपयोग करने पर कार्रवाई होगी।वाहनों की संख्या और लाउडस्पीकर उपयोग पर भी सीमा तय है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंचायत परिसीमन से जुड़ी याचिका खारिज कर राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले 14 नवंबर 2025 को परिसीमन प्रक्रिया को वैध ठहराया था और 31 दिसंबर तक पूरा करने व 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार कर दिया।

राज्य में 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे। सभी पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। हालांकि, 12 जिलों में पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल अभी बाकी है। यदि 'वन स्टेट वन इलेक्शन' के तहत एक साथ चुनाव कराने हैं, तो इन बोर्डों को भंग करना पड़ सकता है।

अन्य महत्वपूर्ण नियम

एक बूथ पर अधिकतम 1100 वोटर ही होने चाहिए।एक वार्ड में औसतन 300-400 वोटर होते हैं, इसलिए कई वार्डों के वोटर एक बूथ पर रखे जा सकते हैं।राजस्थान सरपंच संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नेमीचंद ने कहा कि पिछले चुनाव में उनसे ब्योरा मांगा ही नहीं गया था, वरना वे जरूर देते। कई प्रत्याशी अब कह रहे हैं कि वे नियमों का पालन करेंगे और पारदर्शिता चाहते हैं।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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